
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम न होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना न करना पीडीए (पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक) समाज के खिलाफ बीजेपीई साजिश है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम तक नहीं है, गिनेंगे क्या? जातिगत जनगणना भी बीजेपी का जुमला है।
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सपा नेता ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी का सीधा फार्मूला है-न गिनती होगी, न आनुपातिक आरक्षण-अधिकार देने का जनसांख्यिकीय आधार बनेगा। उन्होंने आगे लिखा कि आज बीजेपी पर भरोसा करनेवाले अपने को ठगा हुआ ही नहीं, बल्कि घोर अपमानित भी महसूस कर रहे हैं।
बीजेपी में जो कार्यकर्ता व नेता अब तक जातिगत जनगणना करवाने का दावा कर रहे थे, वो अब अपने समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचे। वो अब गले से बीजेपीई पट्टा और घरों, दुकानों, वाहनों से बीजेपी का झंडा उतारने के लिए मजबूर हैं।
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सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लिखा कि पीडीए को अपने मान-सम्मान, आरक्षण और अधिकार की लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि अब जब विरोध होगा तो ‘छलजीवी बीजेपी’ फिर कहेगी कि ये टाइपिंग मिस्टेक हो गई। बीजेपी अब इतनी बुरी तरह एक्सपोज हो गई है कि सबको मालूम है कि वह अपने गलत मंसूबों के भंडाफोड़ के बाद आगे क्या करेगी।
दरअसल ये बीजेपीई चालाक नहीं, बेशर्म हैं। सपा मुखिया ने लिखा कि अब शब्दकोशों में ‘वचन-विमुखी’ बीजेपी का मतलब ‘धोखा’ लिख देना चाहिए। गौरतलब है कि जातीय जनगणना को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल लगातार सरकार से सवाल उठाते रहे हैं। विशेष रूप से विपक्षी दलों के नेताओं ने समय-समय पर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है।
विपक्ष का आरोप रहा है कि जातीय जनगणना के बिना सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और आरक्षण की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ सकती। इसके बावजूद सरकार की ओर से इस विषय पर स्पष्ट और ठोस पहल न किए जाने को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती रही है।
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