
उत्तराखंड के चमोली जिले में पीपलकोटी के मायापुर में बन रही टीएचडीसी की रेलवे टनल में गुरुवार को अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आ गया। हादसे के वक्त टनल के अंदर करीब 20 मजदूर मौजूद थे। हादसे से बचकर निकले मजदूरों ने शुक्रवार को अपनी आंखों देखी सुनाई और बताया कि सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि उन्हें संभलने या भागने तक का मौका नहीं मिला।
हादसे में घायल मजदूर सुनील दीवान ने बताया कि घटना इतनी अचानक हुई कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। उनके मुताबिक, टनल में पहले से भी पानी था, लेकिन अचानक कच्ची मिट्टी, पत्थर और पानी तेज दबाव के साथ वहां आ गया। तेज हवा और पानी के दबाव ने मजदूरों को बहा दिया।
एक अन्य घायल मजदूर ने बताया कि पानी का बहाव इतना तेज था कि उसने लोगों को सीधे बाहर की तरफ फेंक दिया। उन्होंने कहा कि जब पानी अचानक जोरदार तरीके से आया तो करीब 15 से 20 लोग उसके साथ बह गए। हादसे के समय मजदूर टनल के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे थे। पानी और मलबा आते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और किसी को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है।
हादसे के बाद घायलों को गोपेश्वर के जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल के डॉक्टर आयुष ने बताया कि टीएचडीसी की ओर से कुल 19 लोगों को अस्पताल लाया गया। इनमें 9 लोगों को मृत घोषित किया गया, जबकि 10 मजदूर अस्पताल में हैं। डॉक्टर के मुताबिक, घायलों की हालत काफी हद तक स्थिर है, जबकि एक मजदूर की स्थिति थोड़ी ज्यादा गंभीर बताई गई है। सभी घायलों का विशेषज्ञों की निगरानी में इलाज चल रहा है।
हादसे की सूचना मिलते ही राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया गया। टनल में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आने से मजदूरों के बीच मची अफरा-तफरी के बाद बचाव दल ने फंसे लोगों को बाहर निकाला। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों के लिए यह घटना गहरे सदमे की वजह बनी है।
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चमोली टनल हादसे की खबर मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पीपलकोटी पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और राहत-बचाव की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर हादसे में घायल मजदूरों का हालचाल भी जाना।
हादसे के बाद प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य पर नजर रखी जा रही है। वहीं, घायल मजदूरों की आपबीती से हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। मजदूरों के मुताबिक, पानी और मलबे का बहाव इतनी तेजी से आया कि उन्हें कुछ समझने या खुद को बचाने का मौका तक नहीं मिला।
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