
कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को फिर से मोदी सरकार को अल्टीमेटम दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा कि वह प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के मोदी सरकार के वादे से संबंधित लिखित समझौते का इंतजार कर रही है। कॉकरोच जनता पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर मंगलवार तक आश्वासन नहीं मिला तो उसे अपना आंदोलन फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिन चले प्रदर्शन को समाप्त करने से पहले सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। रांका ने कहा, ‘‘तीसरे दौर की वार्ता में यह सहमति बनी थी कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस ली जाएंगी और भविष्य में किसी भी आयोजक या प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि कॉजपा ने केंद्रीय मंत्रियों जे पी नड्डा और जितेंद्र सिंह को समझौते का एक मसौदा सौंपा था और इस बात को लेकर सहमति बनी थी कि कानूनी परामर्श के बाद सरकार मंगलवार तक लिखित समझौता साझा करेगी।
उन्होंने कहा, "हम सरकार द्वारा लिखित समझौता साझा किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री इस समझौते का सम्मान करेंगे और प्राथमिकी वापस ली जाएंगी, किसी प्रदर्शनकारी या आयोजक को परेशान नहीं किया जाएगा और भविष्य में कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।"
रांका ने कहा कि अगर मंगलवार तक लिखित समझौता नहीं मिला तथा आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों और आयोजकों को रिहा नहीं किया गया, तो कॉजपा को "फिर से विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।" कहा कि वह प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने के सरकार के वादे से संबंधित लिखित समझौते का इंतजार कर रही है। कॉजपा ने चेतावनी दी कि अगर मंगलवार तक आश्वासन नहीं मिला तो उसे अपना आंदोलन फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिन चले प्रदर्शन को समाप्त करने से पहले सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
रांका ने कहा, ‘‘तीसरे दौर की वार्ता में यह सहमति बनी थी कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस ली जाएंगी और भविष्य में किसी भी आयोजक या प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।"
उन्होंने कहा कि कॉजपा ने केंद्रीय मंत्रियों जे पी नड्डा और जितेंद्र सिंह को समझौते का एक मसौदा सौंपा था और इस बात को लेकर सहमति बनी थी कि कानूनी परामर्श के बाद सरकार मंगलवार तक लिखित समझौता साझा करेगी।
उन्होंने कहा, "हम सरकार द्वारा लिखित समझौता साझा किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री इस समझौते का सम्मान करेंगे और प्राथमिकी वापस ली जाएंगी, किसी प्रदर्शनकारी या आयोजक को परेशान नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।"
रांका ने कहा कि अगर मंगलवार तक लिखित समझौता नहीं मिला तथा आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों और आयोजकों को रिहा नहीं किया गया, तो कॉजपा को "फिर से विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।"
सीनियर वकील कपिल सिब्बल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "हम कपिल जी के लगातार संपर्क में थे और उनसे कानूनी सलाह ली थी। जब हमने 25 तारीख को विरोध प्रदर्शन खत्म किया, तो हमें डर था कि भविष्य में, जब आंदोलन धीमा पड़ जाएगा या विरोध का जोश कम हो जाएगा, तो सरकार लोगों को निशाना बनाना शुरू कर सकती है। यह डर काफी हद तक सही लगता है, क्योंकि दूसरे बड़े विरोध प्रदर्शनों में भी ऐसा ही तरीका अपनाया गया था, जहां लोगों को अलग-थलग करके झूठे मामलों में फंसाया गया था। पहले दिन से ही सभी छात्रों को कानूनी और मेडिकल मदद दी गई है, और वकीलों के साथ तालमेल बिठाया गया है ताकि उन्हें देश भर में मदद मिल सके।
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