
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर सोमवार को मोदी सरकार पर भारत के हितों को दांव पर लगाने का आरोप लगाया और कहा कि देश इस बात का जवाब मांग रहा है कि यह समझौता बराबरी के आधार पर हुआ है या जबरदस्ती किया गया है। उन्होंने यह दावा भी किया कि यह समझौता कई अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार को खोल देगा और इसमें आत्मनिर्भरता के साथ भी समझौता कर लिया गया है।
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रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘व्यापार समझौते देश की संप्रभुता को त्याग कर, गुलामी का रास्ता कभी नहीं हो सकते। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने देश और किसानों की बलि दे दी। भारत की ऊर्जा सुरक्षा से सरेआम खिलवाड़ किया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने जो किया उससे भारत की ‘डिजिटल स्वायत्तता और डेटा की निजता’ पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
उन्होंने कहा कि भारतीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़े होने के बजाय इस मजबूर सरकार ने भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से समझौता कर लिया। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘देश यही सवाल पूछ रहा है कि यह 'मजबूत' सरकार है या 'मजबूर' सरकार? भारत 'आत्मनिर्भर' है या 'अमेरिका-निर्भर' हो गया? मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में भारत के हित को दांव पर लगा दिया है।’’
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सुरजेवाला के मुताबिक, छह फरवरी, 2026 के पहले समझौते के मसौदे में ही सहमति जताई गई है कि भारत बिना किसी आयात शुल्क के अमेरिका के खाद्य व कृषि उत्पादों के लिए हमारा बाजार खोल देगा। उन्होंने सवाल किया कि अगर भारत में प्रसंस्कृत मक्का, ज्वार, सोयाबीन, फल और अन्य उत्पाद भी आएंगे, तो क्या उनका सीधा प्रभाव भारत की जैविक विविधता और बीज शुद्धता पर नहीं पड़ेगा?
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उन्होंने दावा किया कि अब अमेरिकी कपास के भारत में निशुल्क आयात का दरवाजा भी मोदी सरकार ने खोल दिया है। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इसके अलावा, बांग्लादेश भारत से करीब 50 प्रतिशत कपास आयात करता है। मगर अब कपास का भारत से बांग्लादेश को निर्यात भी बंद हो जाएगा, जो कि हमारे किसान पर दोहरी मार होगी।’’
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सुरजेवाला ने कहा कि क्या यह देशहित में है कि व्यापार समझौते में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने की भारत पर पाबंदी लगाई गई है? उन्होंने कहा, ‘‘यह व्यापार समझौता बराबरी के आधार पर हुआ है या जबरदस्ती के आधार पर, देश जवाब मांग रहा है।’’ कांग्रेस महासचिव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जब भी इस व्यापार समझौते के खिलाफ बड़े आंदोलन की रूपरेखा बनेगी, तो उससे सभी को अवगत कराया जाएगा।
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