
औद्योगिक एलपीजी की अनुपलब्धता के कारण दार्जिलिंग चाय के उत्पादन में और गिरावट आ सकती है और पश्चिम बंगाल जिले में कारखानों को आपूर्ति बाधित होने का खतरा है। चाय संघ ने यह बात कही है।
‘दार्जिलिंग टी एसोसिएशन’ ने हाल ही में कोलकाता स्थित टी बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन को पत्र लिखकर इस मुद्दे को उठाया। पत्र में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एक परिपत्र का उल्लेख किया गया है जिसमें सभी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि उनके द्वारा खरीदी गई एलपीजी केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध कराई और बेची जाए।
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संघ ने आगाह किया कि इस आदेश के कारण चाय बागानों के कारखानों को औद्योगिक एलपीजी उपलब्ध नहीं हो पाएगी जिससे दार्जिलिंग चाय के उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा और 55,000 स्थायी श्रमिकों तथा उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
पत्र में कहा गया है, ‘‘इस संगठन के सदस्य आपसे अनुरोध करते हैं कि संबंधित मंत्रालय से बात कर दार्जिलिंग चाय उद्योग के कारखानों को औद्योगिक एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।’’
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संघ ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में दार्जिलिंग के चाय बागानों ने अपने कारखानों को कोयला आधारित प्रणाली से बदलकर औद्योगिक एलपीजी पर आधारित प्रणाली में परिवर्तित कर लिया है।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब दार्जिलिंग चाय उद्योग पहले से ही लंबे समय से उत्पादन संकट का सामना कर रहा है।
उद्योग के अनुसार, वर्ष 1990 में चाय उत्पादन करीब 1.4 करोड़ किलोग्राम के उच्च स्तर से उत्पादन घटकर हाल के वर्षों में 60 लाख किलोग्राम से भी कम रह गया है जबकि 2024 तथा 2025 में उत्पादन ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर दर्ज किया गया। जनवरी से नवंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार उत्पादन में 2024 की समान अवधि की तुलना में 8.79 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की गई।
उद्योग ने कहा कि इसे कई मोर्चों पर संरचनात्मक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों ने कहा कि नेपाल से आने वाली सस्ती चाय जिसकी विशेषताएं दार्जिलिंग चाय से मिलती-जुलती हैं, घरेलू बाजार में बड़ी मात्रा में पहुंच रही है। इससे प्रमाणित दार्जिलिंग चाय की कीमतों में ठहराव आ गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि चाय बागानों में पुरानी झाड़ियों को पर्याप्त रूप से बदलने की कमी भी उत्पादन में लगातार गिरावट का एक कारण है, क्योंकि उद्योग ने पुराने हो चुके बागानों के पुनरोद्धार के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पहली तुड़ाई (फर्स्ट फ्लश) के दौरान औद्योगिक एलपीजी की आपूर्ति में बाधा आती है तो इससे पहले से संघर्ष कर रहे इस उद्योग को और बड़ा झटका लग सकता है। पहली तुड़ाई का समय दुनिया भर में सबसे अधिक प्रीमियम पाने वाला दौर होता है और जिसकी अधिकतर उपज निर्यात की जाती है।
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उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों ने कहा कि नेपाल से आने वाली सस्ती चाय जिसकी विशेषताएं दार्जिलिंग चाय से मिलती-जुलती हैं, घरेलू बाजार में बड़ी मात्रा में पहुंच रही है। इससे प्रमाणित दार्जिलिंग चाय की कीमतों में ठहराव आ गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि चाय बागानों में पुरानी झाड़ियों को पर्याप्त रूप से बदलने की कमी भी उत्पादन में लगातार गिरावट का एक कारण है, क्योंकि उद्योग ने पुराने हो चुके बागानों के पुनरोद्धार के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पहली तुड़ाई (फर्स्ट फ्लश) के दौरान औद्योगिक एलपीजी की आपूर्ति में बाधा आती है तो इससे पहले से संघर्ष कर रहे इस उद्योग को और बड़ा झटका लग सकता है। पहली तुड़ाई का समय दुनिया भर में सबसे अधिक प्रीमियम पाने वाला दौर होता है और जिसकी अधिकतर उपज निर्यात की जाती है।
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