
दिल्ली में जारी एसआईआर की खामियां और चुनाव आयोग की नाकामियां अब खुलकर सामने आने लगी हैं। राजधानी में रहने वाले कई वरिष्ठ मौजूदा और रिटायर्ड आईएएस अफसरों को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किए हैं। इनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु का नाम भी शामिल है। संधु को उनका नाम मिसमैच होने के लिए नोटिस मिला है तो अन्य आईएएस अफसरों को डिस्क्रिपेंसी और नो मैंपिंग का नोटिस मिला है।
ध्यान रहे कि जिन लोगों को नोटिस मिल चुके हैं उनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली बीजेपी नेता वीरेंद्र सचदेव शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने जिन लोगों को नोटिस भेजा है उनमें विदेश सचिव विक्रम मिसरी, सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, प्रधानमंत्री के प्रधान साइंटिफिक एडवाइजर अजय सूद, स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला, मत्स्य विभाग के सचिव अभिलक्ष्य लिखी, उनकी पत्नी सुक्ति लिखी, खाद सचिव रजत कुमार मिश्रा और भू संसाधन सचिव नरेंद्र भूषण आदि शामिल हैं। इन सभी लोगों को ‘पिछली एसआईआर में अनमैप्ड’ का नोटिस मिला है।
इनके अलावा जिन नौकरशाहों को नाम में खामी या मिसमैच का नोटिस मिला है उनमें एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी वुमुल्नमंग वुअलनम का नाम है। इसके अलावा पूर्व आईएएस अफसर और सीएजी के संजय मूर्ति को माता-पिता के नाम से मिसमैच का नोटिस मिला है।
कई रिटायर्ड नौकरशाहों और अधिकारियों को भी गड़बड़ियों के लिए नोटिस मिले हैं। इनमें नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, जेएनयू के पूर्व वाइस-चांसलर और यूजीसी के मौजूदा चेयरमैन एम जगदीश कुमार, पशुपालन विभाग की पूर्व सचिव अलका उपाध्याय, उपभोक्ता मामलों के पूर्व सचिव रोहित कुमार सिंह, उनकी पत्नी और सीआईएसएफ की पूर्व डायरेक्टर-जनरल नीना सिंह, रक्षा विभाग के पूर्व सचिवगिरिधर अरमाने और पर्यावरण विभाग की पूर्व सचिव लीना नंदन शामिल हैं।
जिन अफसरों को नोटिस जारी हुए हैं उनमें से अधिकांश के सरकारी आवास मोतीबाग इलाके में हैं जोकि दिल्ली की दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस बूथ के कुल 593 लोगों को नोटिस भेजे गए हैं।
चुनाव आयोग की लापरवाही का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति में रहे बिबेक देबरॉय के नाम भी नोटिस जारी हुआ है, जबकि 2024 में उनका देहांत हो चुका है।
बता दें कि दिल्ली में एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करते समय चुनाव आयोग ने पहले की वोटर लिस्ट के मुकाबले 47 लाख से ज्यादा लोगों के नाम काट दिए थे। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में हैं उनमें से 33 लाख से ज्यादा लोगों को विभिन्न कारणों के नोटिस भेजे जा रहे हैं। जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं उन सभी को चुनाव आयोग के अधिकारियों के सामने पेश होकर अपने वोटर होने का दावा पेश करना होगा।
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