
दिल्ली हाई कोर्ट ने नजीब अहमद की गुमशुदगी के मामले में सोमवार को सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दे दी। नजीब जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का छात्र था, जो यहां से अक्टूबर 2016 को लापता हो गया था।
Published: 08 Oct 2018, 2:27 PM IST
न्यायाधीश एस मुरलीधर और न्यायाधीश विनोद गोयल की पीठ ने नजीब की मां फातिमा नफीस की बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका को खारिज करते हुए सीबीआई को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की अनुमति दी। अपनी आखिरी सुनवाई में सीबीआई के वकील ने पीठ को बताया कि एजेंसी ने मामले से संबंधित सभी चीजों का विश्लेषण कर लिया है और मामले को बंद करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करना चाहती है।
Published: 08 Oct 2018, 2:27 PM IST
कोर्ट के फैसले के बाद नजीब की मां ने कहा, “मेरे बेटे को गायब हुए 2 साल हो चुके हैं। मुझे कोर्ट से काफी उम्मीदें थीं। कोर्ट के इस फैसले के बाद हम जहां से आगे बढ़े थे फिर वहीं पहुंच गए हैं। सीबीआई ने कोर्ट को गुमराह किया है। अब हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।”
Published: 08 Oct 2018, 2:27 PM IST
इससे पहले नजीब की मां ने कहा था, “हमने सीबीआई को 9 ऐसे लोगों के नाम दिए थे जिन्होंने नजीब को प्रताणित किया था। अगर एजेंसी ने सख्ती से पूछताछ की होती तो कुछ पता चलता। आज तक किसी मंत्री ने हमारे समर्थन में एक ट्वीट भी नहीं किया। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है।”
नजीब की मां फातिमा नफीस ने 14 और 15 अक्टूबर की मध्यरात्रि रात में जेएनयू छात्रावास से अपने बेटे के गायब होने की जांच करने के लिए गैर-सीबीआई अधिकारी को शामिल करने के साथ विशेष जांच टीम (एसआईटी) से मामले की जांच कराने की मांग की थी।
एमएससी प्रथम वर्ष का छात्र नजीब अहमद लगभग दो साल पहले कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों से हाथापाई होने के बाद गुमशुदा हो गया था। उसके गुमशुदा होने की सूचना मिली। हालांकि एबीवीपी ने इस मामले में अपना हाथ होने से इनकार किया है।
(आईएएनएस के इनपुट के साथ)
Published: 08 Oct 2018, 2:27 PM IST
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Published: 08 Oct 2018, 2:27 PM IST