
दिल्ली के जनकपुरी इलाके में सड़क पर खोदे गए गड्ढे में गिरने से बैंक कर्मी कमल ध्यानी की मौत के मामले अहम खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हादसे के तुरंत बाद कम से कम 5 लोगों को इस घटना की जानकारी थी, लेकिन किसी ने भी समय रहते पुलिस या आपात सेवाओं को सूचना नहीं दी। इस गंभीर लापरवाही के आरोप में पुलिस ने एक ठेकेदार को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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एचडीएफसी बैंक में टेलीकॉलर के तौर पर काम करने वाले कमल ध्यानी उत्तर-पश्चिम दिल्ली के रोहिणी से देर रात अपने घर पालम कैलाशपुरी लौट रहे थे। इसी दौरान जनकपुरी क्षेत्र में जोगिंदर सिंह मार्ग पर चल रहे सड़क मरम्मत कार्य के तहत खोदे गए करीब 4.5 मीटर गहरे गड्ढे में उनकी मोटरसाइकिल गिर गई। यह गड्ढा 2 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड की मरम्मत के लिए खोदा गया था।
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पुलिस द्वारा खंगाले गए सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक, रात करीब 12:15 बजे एक काली कार घटनास्थल के पास रुकी। सागरपुर निवासी विपिन सिंह शादी समारोह से लौट रहे थे, तभी उन्होंने बाइक सवार को गड्ढे में गिरते देखा। उन्होंने तुरंत पास की रिहायशी कॉलोनी के मुख्य गेट पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड को इसकी जानकारी दी।
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गार्ड ने पास ही गड्ढे पर काम कर रहे मजदूर योगेश को सतर्क किया। योगेश गड्ढे के पास पहुंचा और उसने देखा कि अंदर एक बाइक पड़ी है, जिसकी हेडलाइट जल रही थी और उसके पास एक व्यक्ति बेसुध हालत में लेटा हुआ था। रात 12:22 बजे योगेश ने इस घटना की जानकारी अपने नियोक्ता और सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार प्रजापति को फोन पर दी।
पुलिस के अनुसार, प्रजापति करीब 20 मिनट बाद मौके पर पहुंचा और उसने भी गड्ढे में शव और बाइक को देखा। इसके बावजूद न तो उसने और न ही योगेश ने पुलिस को सूचना दी।
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जांच में यह भी सामने आया है कि इसके बाद प्रजापति ने अपने मालिक और मुख्य ठेकेदार हिमांशु गुप्ता को फोन किया। गुप्ता, प्रजापति और कुछ अन्य लोगों के बीच कॉन्फ्रेंस कॉल हुई, जबकि कमल ध्यानी का शव उसी समय गड्ढे में पड़ा हुआ था। रात करीब 1:45 बजे प्रजापति वहां से घर लौट गया और योगेश भी कुछ देर बाद मौके से फरार हो गया।
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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार प्रजापति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस जतिन नरवाल ने बताया कि फरार मजदूर योगेश को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश के इटावा स्थित उसके गांव में एक टीम भेजी गई है। वहीं, मुख्य ठेकेदार हिमांशु गुप्ता दिल्ली से बाहर है और उसकी गिरफ्तारी के लिए भी अलग टीम तैनात की गई है।
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पुलिस का कहना है कि इस मामले में हर उस व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है, जिसे हादसे की जानकारी होने के बावजूद उसने चुप्पी साधे रखी। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि सड़क मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
यह मामला न सिर्फ लापरवाही से हुई एक मौत की कहानी है, बल्कि समय पर मदद न मिलने से गई एक जान पर उठते गंभीर सवालों को भी उजागर करता है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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