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दिल्ली-NCR में स्वाइन फ्लू ने बढ़ाई चिंता, हर दूसरा बच्चा फ्लू जैसे लक्षणों से पीड़ित, जानें किसे ज्यादा खतरा

दिल्ली-NCR में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़े हैं। देश में अब तक 1,777 मामले सामने आए हैं और बच्चों में संक्रमण पिछले साल के मुकाबले 6-8 गुना ज्यादा देखा जा रहा है।

फोटो: Getty Images
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दिल्ली-NCR में इन्फ्लुएंजा A (H1N1) यानी स्वाइन फ्लू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों और लैब विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में H1N1 पॉजिटिव मरीजों की संख्या के साथ जांच कराने वालों की तादाद भी बढ़ी है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) के आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक H1N1 के 1,777 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 229 थी। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने बढ़ते मामलों को देखते हुए अलग फ्लू वार्ड बनाया है, जहां संक्रमित मरीजों को दूसरे मरीजों से अलग रखकर इलाज किया जा रहा है।

दिल्ली-NCR में क्यों बढ़ रहे हैं H1N1 के मामले?

डॉ. डांग्स लैब के सीईओ अर्जुन डांग के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में उनकी लैब में H1N1 के कई पॉजिटिव मामले मिले हैं। बुखार, खांसी, जुकाम और ऊपरी श्वसन तंत्र से जुड़े लक्षणों वाले बड़ी संख्या में लोग जांच करा रहे हैं। घर से सैंपल कलेक्शन और आधुनिक मॉलिक्यूलर टेस्टिंग के चलते कुछ ही घंटों में रिपोर्ट मिल रही है, जिससे जरूरत पड़ने पर इलाज समय पर शुरू किया जा सकता है। मेदांता के पल्मोनोलॉजिस्ट और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रंदीप गुलेरिया के मुताबिक, मानसून में हर साल फ्लू और दूसरे वायरल संक्रमण बढ़ते हैं। ज्यादातर H1N1 मरीजों में बीमारी हल्की से मध्यम रहती है और वे 5 से 7 दिन में ठीक हो जाते हैं, लेकिन पहले से दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में संक्रमण गंभीर होकर ICU तक पहुंच सकता है।

सर गंगाराम अस्पताल के चेयरपर्सन और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अतुल कक्कड़ के मुताबिक, फ्लू के मामले आमतौर पर साल में दो बार बढ़ते हैं। पहला दौर मानसून के आसपास और दूसरा अक्टूबर के आखिर में आता है। इस बार पिछले करीब 10 दिनों में मामलों में तेजी आई है और अस्पताल में आने वाले लगभग हर दूसरे मरीज में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। डेडिकेटेड फ्लू वार्ड में ऑक्सीजन, नेबुलाइजर और दूसरी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का इलाज किया जा रहा है। डॉ. कक्कड़ के अनुसार, मौसम में बदलाव इस बार देर से हुआ है और पर्यावरण से जुड़े कारण भी संक्रमण बढ़ने की वजह हो सकते हैं। आमतौर पर फ्लू वैक्सीन हर साल उपलब्ध हो जाती है, लेकिन इस बार नई वैक्सीन अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है और पिछले सीजन की वैक्सीन की पोटेंसी भी खत्म हो चुकी है। इसी वजह से अक्टूबर से पहले ही फ्लू के मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उनके मुताबिक, इस बार भी H1N1 स्ट्रेन ही है और इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है।

बच्चों में 6-8 गुना बढ़े मामले, स्कूल से घर तक फैल रहा संक्रमण

बच्चों में भी इन्फ्लुएंजा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। गाजियाबाद के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, वैशाली के एसोसिएट कंसलटेंट और इंफेक्शियस डिजीज विशेषज्ञ डॉ. इंद्र शेखर प्रसाद के मुताबिक, इस बार बच्चों में H1N1 के मामले पिछले साल के मुकाबले 6-8 गुना ज्यादा देखे जा रहे हैं। हालांकि ज्यादातर बच्चे आराम और दवा से ठीक हो जाते हैं और करीब 1-2 फीसदी बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। सर गंगाराम अस्पताल के पीडियाट्रिक ICU, पल्मोनरी एवं एलर्जी विभाग के सह-निदेशक डॉ. धीरेन गुप्ता के मुताबिक, पिछले करीब दो हफ्तों में बच्चों में इन्फ्लुएंजा के मामले तेजी से बढ़े हैं। OPD में बुखार, खांसी और जुकाम के साथ आने वाला लगभग हर दूसरा बच्चा फ्लू जैसे संक्रमण से पीड़ित दिख रहा है। बच्चों के अस्पताल बेड पर भी दबाव बढ़ा है। हर बच्चे की H1N1 जांच नहीं होती, इसलिए बच्चों में संक्रमण के सटीक आंकड़े बताना मुश्किल है। मामले सभी उम्र के बच्चों में मिल रहे हैं, लेकिन 5 साल से कम उम्र और स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या ज्यादा है। स्कूल से संक्रमण पूरे परिवार में फैलने के मामले भी सामने आ रहे हैं।

बच्चों में आम लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द, नाक बहना, सिरदर्द और बदन दर्द शामिल हैं। कुछ बच्चों में निमोनिया, सांस लेने में परेशानी और ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ रही है। 5 साल से कम, खासकर 2 साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा है। इसके अलावा अस्थमा या पुरानी फेफड़ों की बीमारी, जन्मजात हृदय रोग, कमजोर इम्युनिटी या कैंसर, न्यूरोलॉजिकल बीमारी, डायबिटीज, मोटापा, किडनी या लिवर की बीमारी वाले बच्चों तथा लंबे समय से स्टेरॉयड या इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं लेने वाले बच्चों में खतरा ज्यादा रहता है। वयस्कों में भी अस्थमा, COPD और दूसरी पुरानी सांस की बीमारी, हृदय रोग, डायबिटीज, कीमोथेरेपी, कमजोर इम्युनिटी या इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं लेने वाले मरीजों में संक्रमण गंभीर हो सकता है।

हर मरीज को एंटीवायरल की जरूरत नहीं

डॉ. रंदीप गुलेरिया के मुताबिक, ज्यादातर मरीजों में बीमारी हल्की रहती है और लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। बुजुर्गों और पहले से बीमारी से जूझ रहे हाई-रिस्क मरीजों को डॉक्टर जरूरत के अनुसार ओसेल्टामिविर (Tamiflu) जैसी एंटीवायरल दवा दे सकते हैं। इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के शुरू नहीं करना चाहिए। डॉ. गुलेरिया ने हाई-रिस्क लोगों और बुजुर्गों को हर साल फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। बच्चों के लिए भी फ्लू वैक्सीन उपलब्ध है, जिसमें H1N1 से सुरक्षा शामिल होती है और इसे 6 महीने की उम्र के बाद लगाया जा सकता है। बच्चे की उम्र और पहले टीकाकरण के इतिहास के आधार पर वैक्सीन का शेड्यूल डॉक्टर तय करते हैं।

गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल के प्रिंसिपल डायरेक्टर और इंटरनल मेडिसिन यूनिट हेड डॉ. सतीश कौल के मुताबिक, पिछले करीब एक महीने से OPD में हर दिन फ्लू जैसे लक्षणों वाले 6-7 मरीज आ रहे हैं। इनमें खासतौर पर 65 साल से अधिक उम्र के लोग शामिल हैं और जिन मरीजों की जांच की जा रही है, उनमें बड़ी संख्या में H1N1 पॉजिटिव मिल रहे हैं। हालांकि उनके अस्पताल में अब तक H1N1 से किसी मौत का मामला सामने नहीं आया है। बुजुर्गों में संक्रमण निमोनिया का कारण बन सकता है, जबकि अनियंत्रित डायबिटीज, कैंसर का इलाज करा रहे और इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं लेने वाले लोगों में बीमारी गंभीर हो सकती है।

इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: सांस लेने में परेशानी, तेज सांस चलना, सीने में जकड़न या दर्द, बलगम के साथ लगातार खांसी, 5 दिन से ज्यादा तेज बुखार, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, अत्यधिक सुस्ती या भ्रम, लगातार उल्टी या पानी न पी पाना, बहुत कम पेशाब होना तथा बुखार ठीक होने के बाद दोबारा तेज बुखार और खांसी होना। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारी वाले मरीजों में इन संकेतों को खास तौर पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

संक्रमण रोकने के लिए सावधानी जरूरी

H1N1 से बचाव के लिए डॉक्टर नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत के मुताबिक मास्क पहनने की सलाह देते हैं। बीमारी की स्थिति में घर पर रहना और दूसरों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। H1N1 पॉजिटिव होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार आइसोलेशन और इलाज करना चाहिए तथा संक्रमित व्यक्ति को खासकर बुजुर्गों और गंभीर बीमारी वाले लोगों से अलग रखना चाहिए। बच्चों में फ्लू जैसे लक्षण हों तो उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहिए। एंटीवायरल या एंटीबायोटिक दवा भी बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।

कुल मिलाकर, H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन ज्यादातर मरीजों में संक्रमण हल्का रहता है। चिंता उन लोगों को लेकर ज्यादा है जिनकी उम्र कम है, जो बुजुर्ग हैं या पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 21 अगस्त को H1N1/इन्फ्लुएंजा की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में फ्लू जैसे लक्षण (ILI), गंभीर सांस की बीमारी (SARI), टेस्टिंग और लैब निगरानी की स्थिति की समीक्षा हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अधिकारियों को H1N1 मामलों पर लगातार नजर रखने और अचानक बढ़ोतरी होने पर समय पर पहचान व इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार राज्यों, अस्पतालों और लैब के साथ मिलकर H1N1 समेत मौसमी फ्लू की निगरानी और तैयारियों पर काम कर रही है। ऐसे में घबराने के बजाय सतर्क रहना, समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और संक्रमण को फैलने से रोकने वाली सावधानियां अपनाना सबसे जरूरी है।