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दिल्ली दंगा साजिश केस: उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट में मांगी थी 15 दिन की राहत

उमर खालिद ने अदालत से कहा था कि उनके परिवार में पिता, मां और पांच बहनें हैं, लेकिन उनके 71 वर्षीय पिता मां की देखभाल करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इकलौते बेटे होने के नाते वही अपनी मां की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल कर सकते हैं।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी उमर खालिद को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। उमर खालिद ने अपने दिवंगत मामा के चेहलुम में शामिल होने और बीमार मां की देखभाल के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी थी।

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उमर खालिद ने अदालत से कहा था कि उनके परिवार में पिता, मां और पांच बहनें हैं, लेकिन उनके 71 वर्षीय पिता मां की देखभाल करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी चार बहनें शादीशुदा हैं और अलग-अलग जगहों पर रहती हैं। ऐसे में परिवार के सबसे बड़े और इकलौते बेटे होने के नाते वही अपनी मां की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल कर सकते हैं।

याचिका में यह भी कहा गया कि उमर खालिद को पहले भी कई बार अंतरिम जमानत मिल चुकी है। हर बार उन्होंने अदालत की सभी शर्तों का पालन किया और समय पर सरेंडर किया।

बचाव पक्ष ने दलील दी कि अदालत ने सह-आरोपी तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान और अथर खान को भी पारिवारिक बीमारी जैसे आधारों पर अंतरिम जमानत दी थी, इसलिए समानता के आधार पर उमर खालिद को भी राहत मिलनी चाहिए।

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वहीं, विशेष लोक अभियोजक ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी अदालत की नरमी का गलत फायदा उठा रहा है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि पहले जिन कारणों को उचित माना गया था, उन आधारों पर जमानत दी गई थी, लेकिन इस बार दिए गए कारण पर्याप्त नहीं हैं।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि मामा का चेहलुम करीबी रिश्तेदारों की श्रेणी में नहीं आता और इस रस्म में शामिल होना जरूरी नहीं है। परिवार के अन्य सदस्य भी इस औपचारिकता को पूरा कर सकते हैं। वहीं, मां की सर्जरी को लेकर कहा गया कि यह कोई गंभीर ऑपरेशन नहीं बल्कि मामूली सर्जरी है, जिसमें केवल लोकल एनेस्थीसिया दिया जाएगा। साथ ही परिवार में अन्य सदस्य भी उनकी देखभाल कर सकते हैं।

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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद कहा कि यह सही है कि पहले उमर खालिद और अन्य सह-आरोपियों को अंतरिम जमानत दी गई थी और उन्होंने शर्तों का उल्लंघन नहीं किया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बार जमानत मांगने पर उसे मंजूर कर लिया जाए। अदालत ने कहा कि हर नई याचिका को उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर परखा जाना चाहिए और तभी राहत दी जानी चाहिए, जब कारण उचित हों।

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कोर्ट ने कहा कि इस बार उमर खालिद ने दो आधारों पर अंतरिम जमानत मांगी थी, पहला, अपने मामा के चेहलुम में शामिल होने के लिए और दूसरा, मां की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल के लिए। हालांकि अदालत ने इन कारणों को पर्याप्त नहीं मानते हुए उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

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