
पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। अब इस अहम याचिका पर शीर्ष अदालत 3 फरवरी को सुनवाई करेगी। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि प्रक्रिया बेहद व्यापक और भारी है। ऐसे में मौजूदा समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल है।
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राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि एसआईआर के दौरान राज्य में जो हालात बने हैं, वे सामान्य नहीं, बल्कि गंभीर हैं।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पिछली सुनवाई का हवाला देते हुए कहा कि अदालत पहले ही यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दे चुकी है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और सुधार का पूरा मौका मिले।
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कपिल सिब्बल ने साफ किया कि याचिका में समय-सीमा बढ़ाने की मांग का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया बेहद व्यापक और भारी है। नोटिस जारी किए जाने हैं और हर दिन करीब 9 लाख आपत्तियों पर सुनवाई करनी पड़ रही है। अब तक सिर्फ करीब 1 लाख मामलों की ही सुनवाई हो पाई है। ऐसे में मौजूदा समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
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वहीं, चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील राकेश द्विवेदी ने पश्चिम बंगाल सरकार की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बार-बार अर्जियां डालकर समय को आगे बढ़ाना है, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल समय-सीमा बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पूरी प्रक्रिया का मजाक बन जाएगा। इस बीच तमिलनाडु सरकार की ओर से एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 3 फरवरी को सुनवाई करेगा।
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