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बजट भाषण को लेकर डेरेक ओ ब्रायन का हमला, 'अल्पसंख्यकों का जिक्र नहीं होना सरकार की मानसिकता को दर्शाता है'

सभी प्रकार के सामाजिक, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों की अनदेखी करने का सरकार पर आरोप लगाते हुए ब्रायन ने कहा कि यह सरकार की उस मानसिकता को दर्शाता है जो 'घृणास्पद अपराधों' को बढ़ावा देती है।

फोटोः सोशल मीडिा
फोटोः सोशल मीडिा 

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में किसी भी अल्पसंख्यक समूह का जिक्र नहीं होने पर शुक्रवार को आपत्ति जताई।

डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि 85 मिनट लंबे भाषण में अल्पसंख्यक शब्द का प्रयोग केवल 'माइनरिटी’ (अल्पांश) शेयरधारकों के संदर्भ में ही किया गया। सभी प्रकार के सामाजिक, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों की अनदेखी करने का सरकार पर आरोप लगाते हुए ब्रायन ने कहा कि यह सरकार की उस मानसिकता को दर्शाता है जो 'घृणास्पद अपराधों' को बढ़ावा देती है।

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राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता ब्रायन ने कहा, ‘‘पूरे बजट भाषण में किसी भी धार्मिक, सामाजिक या भाषाई अल्पसंख्यक का ज़िक्र नहीं था। केवल ऐसे शेयरधारकों का ही उल्लेख किया गया। यह उस मानसिकता को दर्शाता है जो घृणास्पद अपराधों को बढ़ावा देती है।’’

उन्होंने कहा कि यही मानसिकता अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित विभिन्न संस्थानों के लिए विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) को रद्द करने और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के एक वर्ष से अधिक समय से बिना अध्यक्ष रहने जैसे कार्यों में भी झलकती है।

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उन्होंने कहा, “ईसाई समुदाय द्वारा संचालित 2,000 से अधिक संस्थानों के लिए एफसीआरए रद्द कर दिया गया है। ईसाई समुदाय द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले चार में से तीन छात्र अन्य समुदायों से हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) में अध्यक्ष और सदस्यों के पद रिक्त हैं और पिछले एक वर्ष से कोई बैठक नहीं हुई है।”

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद अप्रैल 2025 में पूर्व अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा की सेवानिवृत्ति के बाद से रिक्त हैं।

ब्रायन ने कहा कि बजट भाषण में ‘‘एलजीबीटीक्यू’’ समुदाय जैसे सामाजिक अल्पसंख्यकों का भी कोई ज़िक्र नहीं था।

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तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि अल्पसंख्यकों के प्रति यह नफरत इस सरकार के डीएनए में शामिल है। वे एक भी मुस्लिम को नहीं ढूंढ पाए और उन्हें इतना सम्मान भी नहीं दे पाए कि सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय से किसी को अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री नियुक्त किया जाए।’’

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर निशाना साधते हुए ब्रायन ने कहा, ‘‘अब आप समझ गए होंगे कि असम के मुख्यमंत्री ऐसे वीडियो क्यों बनाते हैं। अल्पसंख्यकों से नफरत करना और उन्हें निशाना बनाना इस सरकार की नीति है।’’

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शर्मा ‘मिया मुसलमानों’ पर अपनी टिप्पणी और बाद में सोशल मीडिया पर पोस्ट एक वीडियो (जिसे अब हटा दिया गया है) को लेकर राजनीतिक विवाद में रहे हैं।

इस वर्ष के केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के लिए कुल 3,400 करोड़ रुपये का बजटीय अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के बजटीय अनुमान से 50 करोड़ रुपये अधिक और 2025-26 के संशोधित अनुमान से लगभग 1,240 करोड़ रुपये अधिक है।

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