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'हमारा सब कुछ जलकर राख', यात्रियों का गुस्सा फूटा, रेलवे पर लापरवाही लगाते हुए लोगों का छलका दर्द

एक यात्री ने बताया कि आग लगने के बाद हमने चेन खींची थी, लेकिन आग लगने के बाद फायर अलार्म नहीं बजा था। हमारा पूरा सामान जल गया है। महिला के चिल्लाने पर सब लोग उठ गए। इतने में कोच के अंदर धुआं भर गया और सब भागने लगे।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में आग लगने की घटना के बाद यात्रियों ने विरोध-प्रदर्शन किया। यात्रियों ने रेलवे पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कहा कि आग के दौरान न तो समय पर अलार्म बजा और न ही तुरंत राहत मिली, जिससे उनका सामान और कीमती वस्तुएं जलकर नष्ट हो गईं। रेलवे ने ट्रेन को अतिरिक्त कोच जोड़कर आगे रवाना किया और यात्रियों को 5,000 रुपए की सहायता राशि दी, जबकि कई यात्री एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोटा में ही रुके रहे।

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एक यात्री ने बताया कि आग लगने के बाद हमने चेन खींची थी, लेकिन आग लगने के बाद फायर अलार्म नहीं बजा था। हमारा पूरा सामान जल गया है। कई लोगों को तो चप्पल तक नहीं मिली। सबसे पहले एक महिला टॉयलेट जाने के लिए उठी तो उसने गेट के पास आग देखी। महिला के चिल्लाने पर सब लोग उठ गए। इतने में कोच के अंदर धुआं भर गया और सब भागने लगे।

भूषण नाम के एक यात्री ने बताया कि आग लगने के बाद चार-पांच लोगों ने मिलकर बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश की। इस बीच एक मालगाड़ी बगल के ट्रैक से निकली तो आग और भड़क गई। आग भड़कते ही हम ट्रेन से कूद गए तो पैर में चोट लग गई। सामान पूरा जल गया है। हम बच गए, यही बड़ी बात है। यात्री ने बताया कि मेरा बैग जल गया। उसमें लैपटॉप, मार्कशीट, कैश समेत जरूरी कागजात थे, सब जल गए।

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महिला ने कहा कि एक साल की मेहनत जल गई। पैसा, कागज सब जल गए। हम गोवा से हरियाणा जा रहे थे। बैग में ही सबकुछ था, सब जल गया। हमारा बहुत नुकसान हुआ है। हमें आज मौत सामने दिखाई दे रही थी। हम सब जल जाते।

महिला ने रेलवे पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि काफी देर बाद हमें पानी दिया गया, वह भी ठंडा नहीं था। हमें सिर्फ भगाया जा रहा था, हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। मैंने अपने लिए दवाई मांगी तो कहा गया, सब कोटा में मिलेगा।

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संजू मिश्रा नाम की महिला ने कहा कि अगर बचाव सही समय पर हुआ होता तो कुछ सामान बच जाता, लेकिन तीन घंटे तक हमने सबकुछ जलते हुए देखा। आग बुझाने के लिए पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ी में पानी भी नहीं था। गांव वालों की मदद से पानी लाकर आग बुझाई गई। महिला ने कहा कि धुएं से शुरुआत हुई, हमने पूरे कोच को जलते हुए देखा। उसके बाद हमने राहत बचाव कार्य देखा। हम सूरत से दिल्ली घूमने जा रहे थे। कैश, कपड़े, ज्वेलरी सब जल गए।

महिला ने कहा कि आग लगने के बाद किसी से मदद नहीं मिली, हम सभी खुद ही ट्रेन से कूदकर भागने लगे थे। किसी को अपने सामान की याद ही नहीं आई।

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रेलवे अधिकारी का कहना है कि कुछ यात्रियों ने एफआईआर करने की मांग की थी। उन्होंने आगे की यात्रा करने से मना कर दिया और कहा कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, वे आगे नहीं जाएंगे। रेलवे की तरफ से पांच हजार रुपए की स्पेशल राहत भी जारी की गई है। रेलवे ने सभी यात्रियों के खाने-पीने की व्यवस्था की है। अगर किसी को क्लेम करना है तो वह कर सकते हैं, लेकिन यात्रियों को तुरंत राहत देने के लिए पांच हजार रुपए की राशि दी गई है।

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