क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि हम उन क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं की बहाली की मांग करते हैं, जहां आंदोलन चल रहा है। अन्यथा, हम देश में इसके खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
ऑल इंडिया किसान फेडरेशन के अध्यक्ष प्रेम सिंह भंगू ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से 27 जनवरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें पूछा गया था कि परेड के लिए हुए समझौते का उल्लंघन करने के लिए कार्रवाई क्यों न की जाए। जबकि एफआईआर 26 तारीख को ही दर्ज की गई, इसलिए यह नोटिस अप्रासंगिक है।
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों ने ऐलान किया है कि 30 जनवरी को सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सभी किसान नेता सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपवास रखेंगे। किसान नेता अमरजीत सिंह राडा ने सभी देशवासियों से इस देशव्यापी अनशन में भाग लेने की अपील की है।
किसान एकता मोर्चा ने ऐलान किया है कि 30 जनवरी को सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सभी किसान नेता सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उपवास रहेंगे।
किसानों के प्रदर्शन पर कांग्रेस नेता हनुमंत राव ने कहा, “कांग्रेस पार्टी किसानों के हित में खड़ी रहनी चाहिए। मेरी राहुल, प्रियंका और सोनिया गांधी से अपील है कि किसानों के मुद्दे पर हमें लड़ना चाहिए। अब पता चल गया है कि प्रधानमंत्री गरीबों के लिए काम नहीं करते हैं।”
भारतीय किसान यूनियन प्रवक्ता राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद किसानों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में महापंचायत बुलाई गई है। इस महापंचायत में कई पड़ोसी राज्यों के किसान भी जुट रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के नेत नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार हठधर्मी हो रही है, अगर सरकार चाहती तो फैसला बहुत जल्दी हो जाता। अगर मुद्दे का हल नहीं होता तो गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन चलेगा।
सिंघु बॉर्डर पर किसान गुटों और लोगों के बीच झड़प हुई है। लोगों ने किसानों के टेंट तोड़ दिए। बताया जा रहा है सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे लोग किसानों से प्रदर्शन स्थल खाली करने की मांग कर रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ।
उत्तर प्रदेश के एडीजी कानून और व्यवस्था प्रसांत कुमार ने कहा, “यूपी सरकार ने शुरू से ही कहा था कि हम किसानों से बात करके समाधान निकालेंगे। इसके अनुसार, अब तक सब कुछ किया गया है। कल या आज सुरक्षा इसलिए कड़ी की गई थी, ताकि कोई उपद्रवी तत्व अशांति भरे माहौल के विरोध में प्रवेश न करे।”
गाजीपुर बॉर्डर पर दिल्ली डिप्टी सीएम ने कहा, “मुझे केजरीवाल जी ने यहां भेजा है, कल रात आपकी बात हुई। उसके बाद उन्होंने यहां पर पानी के टैंकर और अन्य व्यवस्था कराई। उन्होंने मुझे यहां निरीक्षण करने को कहा था। उन्होंने यह भी कहा है कि और भी कोई जरूरत हो तो दिल्ली सरकार आपके सेवा के लिए तैयार है।”
सिंघु बॉर्डर से दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, “हमारे पानी के टैंकर रात से यहां खड़े हैं, टैंकर को पुलिस अंदर नहीं जाने दे रही है। पुलिस ने कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले हैं। ये बीजेपी के आदेशों पर काम कर रहे हैं, बीजेपी नेता के लोग किसानों के साथ अपना बदला ले रहे हैं।”
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “कल जो तीन काले कानूनों के खिलाफ हम लोगों की मानव श्रृंखला होने जा रही है, उसकी तैयारियों को लेकर हम लोगों के बीच चर्चा हुई है। हर जिले में समन्वय समिति बनाकर तैयारी की जा रही है।”
तेजस्वी यादव ने आगे कहा, “यह कृषि कानून देश की लगभग 80 फीसदी आबादी को प्रभावित करता है। हम महागठबंधन के लोग मजबूती से किसानों के साथ खड़े हैं। जब आरजेडी की सरकार रही तब एमएसपी से भी अधिक दाम पर फसलों की खरीद हुई है। हम नीतीश कुमार जी से पूछना चाहते हैं कि आप चुप क्यों हैं।”
कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “राष्ट्रपति के संबोधन का बहिष्कार करने का मतलब उनका अपमान करना नहीं है। हम किसानों के साथ खड़े हैं और मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। राष्ट्रपति के संबोधन का बहिष्कार करने के पीछे हमारा सबसे बड़ा कारण यही है। जब मोशन ऑफ थैंक्स और डिबेट होगी तो हम बहस करेंगे।”
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा, “कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। हमने राष्ट्रपति के अभिभाषण का विरोध किया और किसानों के समर्थन में नारे लगाए। हमें सेंट्रल हॉल के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी, इसलिए हमने इसके गेट पर नारे लगाए। किसानों को देशद्रोही कहा जा रहा है। इसलिए, हमने संबोधन का बहिष्कार किया।”
संजय सिंह ने कहा, “किसानों को इस ठंड में पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले झेलने पड़े। यह तीनों कानून वापस होने चाहिए। इसके लिए आज हम लोगों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का विरोध किया और वहां नारे लगाए। हम लोगों को सेट्रल हॉल में नहीं घुसने दिया गया।”
दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने सिंघु बॉर्डर जाकर किसानों के लिए की गईं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। राघव चड्ढा ने बताया, "आज भाजपा की सरकार अन्नदाता तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचने दे रही है।"
किसान महापंचायत पर मुजफ्फरनगर के एडीएम ने कहा, “कल रात से हम लोग नरेश टिकैत जी के संपर्क में हैं। उनके पदाधिकारियों से प्रशासन बात कर रहा है। उनसे किसानों की संख्या कम रखने के लिए कहा गया है, क्योंकि भीड़ ज्यादा होने से असामाजिक तत्वों के घुसने का डर रहता है।”
शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल, “पिछले 6 महीने से आंदोलन कर रहे कम से कम 200-300 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। अब तक भारत सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, अब दादागिरी के साथ उनके संघर्ष को कम खत्म करना चाहते हैं। इसलिए सभी विपक्षी पार्टियां एकमत हैं कि देश के किसानों के साथ ज़ुल्म हो रहा है।”
दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शनस्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा, "किसान नेताओं ने सीएम से पानी, बिजली और टॉयलेट्स की सुविधा के लिए निवेदन किया था। रात को ही यहां व्यवस्था कर दी गई थी। मैं निरीक्षण करने आया हूं कि कोई दिक्कत तो नहीं आ रही।"
सिंघु बॉर्डर से किसान मजदूर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू ने कहा, “सरकार जो भी करे हम सिंघु बॉर्डर नहीं छोड़ेंगे। जब तक कानून रद्द नहीं हो जाते और MSP पर नया कानून नहीं बन जाता हम यहां से नहीं जाएंगे।”
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के धरना स्थल पर पहुंचे आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने कहा, “आज संसद के सत्र का पहला दिन है और यह मुद्दा संसद के अंदर भी उठना चाहिए। अगर सरकार पीछे हटती है तो इससे उनकी कमजोरी नहीं झलकेगी। प्रधानमंत्री सब विषयों पर बोलते हैं, किसान के बारे में भी बोल दें।”
राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “पीएम हमारे किसान-मजदूर पर वार करके भारत को कमज़ोर कर रहे हैं। फायदा सिर्फ देश-विरोधी ताकतों का होगा।”
कृषि कानूनों के खिलाफ गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का आंदोल जारी। इस एक बार फिर किसान नेता राकेश टिकैत का बयान आया है। उन्होंने कहा कि हम धरना स्थल खाली नहीं करेंगे। मुद्दों पर सरकार से बात करेंगे। साथ ही उन्होंने किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की अपील की।
आरएलडी नेता जयंत चौधरी गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच गए हैं, जहां किसान तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने बताया, "हमारे पास अभी ऐसा (प्रदर्शन स्थल खाली करने का) कोई आदेश नहीं आया है। कल शाम को डीएम की तरफ से एक नोटिस आया था, उस पर चर्चा करने के बाद उसका जवाब देंगे।"
गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी है। लाख कोशिशों के बावजूद योगी सरकार धरना स्थल खाली नहीं करा पाई। किसान नेता राकेश टिकैत अड़ गए। ऐसे में पुलिस को देर रात बैरंग लौटना पड़ा। बड़ी संख्या में किसान गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। NH-24, गाजीपुर बॉर्डर आने और जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया गया है। उधर, आज मुजफ्फरनगर में किसानों की महापंचायत है।
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Published: 29 Jan 2021, 8:24 AM IST