
पश्चिम बंगाल में कोलकाता पुलिस ने मंगलवार को ‘बांग्ला पक्ष’ के नेता गार्गा चटर्जी को हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बारे में गलत सूचना फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चटर्जी के खिलाफ मुख्य आरोप मतदान के दिन उनके द्वारा सोशल मीडिया पर की गई उन पोस्ट से संबंधित है जिनमें उन्होंने ईवीएम की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने लालबाजार में पत्रकारों को बताया, ‘‘उनके खिलाफ शिकायत कोलकाता उत्तर के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) ने दर्ज कराई थी जिसके बाद साइबर प्रकोष्ठ ने कार्रवाई शुरू की। उन्हें इस मामले में दो बार तलब किया गया था लेकिन वह पेश नहीं हुए और इसी वजह से उन्हें आज गिरफ्तार किया गया।’’ गार्गा को बुधवार को अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। पुलिस पूछताछ के लिए उनकी हिरासत की मांग कर सकती है।
Published: undefined
कोलकाता पुलिस की साइबर सेल के अधिकारियों ने गार्गा चटर्जी को दक्षिण कोलकाता के देशप्रिय पार्क इलाके से गिरफ्तार किया। उन पर चुनावों के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से जुड़ी अफवाहें फैलाने का आरोप है। अधिकारियों का मानना था कि ऐसी टिप्पणियां सिर्फ आलोचना नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के भरोसे को कमजोर करने की एक जान-बूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने चुनावों के दौरान ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर जनता के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश की।
Published: undefined
एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि गार्गा चटर्जी ने 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के दिन कथित तौर पर ईवीएम में खराबी को लेकर सवाल उठाए थे जब तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई बूथ पर मतदान देरी से शुरू हुआ था। चटर्जी ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में सवाल उठाया था कि पिछली रात जांच किए जाने के बावजूद सुबह ईवीएम में खराबी क्यों आ गई। उन्होंने मतदाताओं को सलाह दी थी कि वोट डालने के बाद मतदान केंद्र छोड़ने से पहले वीवीपैट पर्ची की सावधानीपूर्वक जांच कर लें।
Published: undefined
अधिकारी ने बताया कि चटर्जी ने इसके बाद चार मई को मतगणना के दिन एक बार फिर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से निर्वाचन आयोग को निशाना बनाया और आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग एक ‘‘गुप्त साजिश’’ रच रहा है। गार्गा चटर्जी ने वोटों की गिनती के दौरान ईवीएम में कथित खराबी पर सवाल उठाए थे, जबकि मशीनें पिछली रात ही सील कर दी गई थीं। जांचकर्ताओं ने दावा किया कि चुनावों के दौरान ईवीएम पर गार्गा की टिप्पणियां आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) और साइबर कानून का उल्लंघन हैं।
Published: undefined
बता दें कि ‘बांग्ला पक्ष’ बांग्ला हितों की एक पैरोकार संगठन है। गार्गा चटर्जी, जो 2017 से ही हिंदी भाषी क्षेत्रों के कथित सांस्कृतिक वर्चस्व के खिलाफ मुखर रहे हैं, उन्होंने हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के दौरान इस मुद्दे को 'बंगाली बनाम बाहरी' के नैरेटिव के तौर पर भी पेश किया था। 'बांग्ला पक्ष' ने चुनाव से पहले एक जुलूस की अनुमति नहीं देने का आरोप भी चुनाव आयोग पर लगाया था और दावा किया था कि बंगाली महीने बैसाख के पहले दिन के लिए नियोजित एक रैली की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था।
Published: undefined
Google न्यूज़, व्हाट्सएप, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined