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गौरी लंकेश की याद में बेंगलुरू में ‘गौरी दिवस’ का आयोजन, देश भर के बुद्धिजीवी, कार्यकर्ता और छात्र जुटे

गौरी लंकेश के सम्मान में उनके परिजनों, देश भर से जुटे समर्थकों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और छात्र नेताओं ने उनके जन्मदिन 29 जनवरी को ‘गौरी दिवस’ के रूप में मनाया।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया गौरी लंकेश की याद में बेंगलुरू के टाउन हॉल में ‘गौरी दिवस’ का आयोजन किया गया

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश के 56वें जन्मदिन के अवसर पर 29 जनवरी को देश भर के कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र नेता बेंगलुरू के टाउन हॉल में जुटे। गौरी लंकेश के सम्मान में उनके परिजनों, समर्थकों, सहयोगियों, प्रशंसकों और देश भर से जुटे छात्र नेताओं ने उनके जन्मदिन ‘गौरी दिवस’के रूप में मनाया।

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उनकी याद में आयोजित यह कार्यक्रम बेंगलूरु के टाउन हॉल में किया गया। कार्यक्रम में अभिनेता प्रकाश राज, मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला, रोहित वेमूला की मां राधिका वेमूला, एचआर दोरेस्वामी, छात्र नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी, जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार, शेहला राशिद और उमर खालिद के अलावा कई कलाकार, लेखक और बुद्धिजीवी शामिल हुए।

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कार्यक्रम में बोलते हुए जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार ने कहा, “आज गौरी अम्मा का जन्मदिन है। अम्मा, तुम्हारी यादें और तुम्हारी ममता हमेशा हमारे साथ हैं, पर काश तुम भी साथ होती। लेखन की स्वतंत्रता और लोकतंत्र को जिंदा रखने के संघर्षों में तुम्हारे विचार और तुम्हारी सीख हमेशा साथ रहेगी।”

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जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद ने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गौरी की हत्या हुई थी, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि गौरी ने अपनी जिंदगी कैसे गुजारी थी। हम लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और न्याय के लिए गौरी के संघर्षों को जारी रखते हुए उन्हें जिंदा रखेंगे।”

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गौरी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘गौरी दिवस’ का मकसद गौरी लंकेश की स्मृति को पुनर्जीवित करना था। कार्यक्रम में उनकी दो पुस्तकों ‘आई एम गौरी: ए फ्लेमिंग मूनलाईट’ और ‘गौरी बुके’ का विमोचन भी किया गया।

क्रांतिकारी पत्रकार और दक्षिणपंथियों की कठोर आलोचक रहीं गौरी लंकेश की 5 सितंबर को बेंगलूरू में उनके घर पर ही गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। गौरी लंकेश की क्रूर हत्या के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए थे। गौरी की हत्या के कई महीनों के बाद भी विशेष जांच दल (एसआईटी) अभी तक उनके हत्यारों को ढूढ़ नहीं पाई है।

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