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गोरखपुर उपचुनाव: सीएम योगी के करीबी हैं गोरखपुर के विवादित डीएम, बीजेपी के पिछड़ने पर रोका नतीजों का ऐलान

गोरखपुर लोकसभा सीट योगी आदित्यनाथ के नाक का सवाल है। वह किसी कीमत पर इसे नहीं खोना चाहते हैं। लेकिन लगता है कि उनकी इस चाहत को पूरा करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने अपने कंधों पर ले रखी है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया गोरखपुर में मतगणना केंद्र के बाहर मीडिया से बात करते हुए डीएम राजीव रौतेला

उत्तर प्रदेश की गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के वोटों की गिनती जारी है। गोरखपुर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है और वह यहीं से सांसद रहे हैं। इसीलिए ये सीट उनकी नाक का सवाल बन गया है और वह किसी भी कीमत पर इस सीट को खोना नहीं चाहते हैं। लेकिन लगता है कि उनकी इस चाहत को पूरा करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन ने अपने कंधों पर ले रखी है।

खबरों के मुताबिक, गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के वोटों की गिनती शुरू होते ही प्रशासन का दखल शुरू हो गया। दूसरे राउंड की गिनती के बाद जैसे ही बीजेपी पिछड़ी तो जिले के डीएम राजीव रौतेला ने नतीजों की घोषणा पर ही रोक लगा दी। यहीं नहीं इसके साथ डीएम ने वहां मौजूद सभी पत्रकारों को भी मतगणना केंद्र से बाहर कर दिया और नतीजों की रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि गोरखपुर में इस समय 12 से ज्यादा राउंड की गिनती पूरी हो चुकी है, लेकिन नतीजों की घोषणा नहीं की जा रही है। राजनीतिक दलों और पत्रकारों के हंगामा करने और चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इसकी जानकारी देने के बाद भी डीएम ने सिर्फ चार राउंड के नतीजों की ही घोषणा की ।

Published: 14 Mar 2018, 1:54 PM IST

हालांकि, मतगणना केंद्र पर मौजूद डीएम राजीव रौतेला ने आरोपों से इनकार करते हुए धीमी मतगणना को इसकी वजह बताया और कहा कि पर्यवेक्षक के साइन नहीं करने की वजह से नतीजे नहीं घोषित किए जा सके हैं। उनका कहना है कि जानकारी देने के लिए पर्यवेक्षक का इंतजार किया जा रहा है।

Published: 14 Mar 2018, 1:54 PM IST

स्थानीय पत्रकारों के अनुसार प्रशासन मतगणना के नतीजों की सूचना मीडिया को देने से बच रहा है और साथ ही उसे अंदर भी नहीं जाने दिया जा रहा है। गोरखपुर डीएम के इस व्यवहार पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर इसे शर्मनाक बताया है। उन्होंने लिखा, गोरखपुर में मतगणना के नतीजों की घोषणा पर रोक लगाना और मीडिया को बाहर निकालना गोरखपुर के डीएम की शर्मनाक कार्रवाई है। डीएम को संबोधित करते हुए सरदेसाई ने आगे लिखा, भगवान के लिए ! सर, आप सरकारी नौकर हैं, ना कि किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधी।

Published: 14 Mar 2018, 1:54 PM IST



इस घटना की शिकायत करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि लोगों और मीडिया को गोरखपुर मतगणना केंद्र से बाहर कर दिया गया है। डीएम और जिला प्रशासन बीजेपी को जीताने के लिए काम कर रहा है।

Published: 14 Mar 2018, 1:54 PM IST

वहीं, इस घटना को लेकर राज्य विधानसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अवैध तरीके से नतीजों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। विपक्ष के हंगामे पर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। इससे पहले समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण कुमार निशाद ने मतगणना के लिए लाई गई इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया था कि ईवीएम बदल दिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी जीत को सुनिश्चित बताया था।

इस घटनाक्रम के केंद्र में रहे गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला को सीएम योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी माना जाता है। रौतेला मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं, जहां से खुद सीएम योगी आदित्यनाथ आते हैं। पिछले वर्ष गोरखपुर में के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई बच्चों की मौत के समय भी रौतेला यहीं तैनात थे। पूरे देश को हिलाकर रख देने वाली इस घटना के बाद कई डॉक्टरों समेत कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई थी, लेकिन उस समय भी रौतेला के पद पर कोई आंच नहीं आई थी।

यही नहीं रौतेला का विवादों से पहले से चोली दामन का साथ रहा है। उनका नाम अवैध खनन के मामले में भी विवादों में आ चुका है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें निलंबित करने का आदेश दिया था। दिसंबर 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला और कानपुर देहात के डीएम राकेश कुमार सिंह को निलंबित करने का आदेश दिया था। यह निलंबन अवैध खनन मामले के संबंध में किया गया था। दोनों पर रामपुर में नियुक्ति के दौरान अवैध खनन रोकने के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप है।

Published: 14 Mar 2018, 1:54 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और न्यायाधीश एमके गुप्ता की पीठ ने मुख्य सचिव को आदेश देते हुए कहा था कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ फौरन कार्रवाई की जाए।

लेकिन हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गोरखपुर के डीएम के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। रौतेला तमाम आरोपों और विवादों के बावजूद गोरखपुर में लगातार बने हुए हैं। कहा जाता है कि सीएम योगी आदित्यनाथ का बेहद करीबी होने की वजह से उन्हें गोरखपुर में तैनात किया गया है।

Published: 14 Mar 2018, 1:54 PM IST

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Published: 14 Mar 2018, 1:54 PM IST