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'कॉकरोच जनता पार्टी’ के हैंडल में सरकार को दिखा राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा, IB रिपोर्ट पर एक्स से करा दिया 'ब्लॉक'

एक अधिकारी ने बताया कि, “मंत्रालय को खुफिया विभाग से एक इनपुट मिला था, जिसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के एक्स अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए कहा गया था। खुफिया विभाग का कहना था कि यह अकाउंट भारत की संप्रभुता के लिए खतरा पैदा कर रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी का बैनर (जैसा कि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है)
कॉकरोच जनता पार्टी का बैनर (जैसा कि सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है) 

कॉकरोच जनता पार्टी का एक्स हैंडल ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं’ के चलते बंद कराया गया है। यह बात एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कही है। अधिकारी ने बताया कि खुफिया विभाग (इंटेलिजेंस ब्यूरो) से मिली जानकारी के बाद सरकार ने इस एक्स हैंडल को भारत में ब्लॉक करने का आग्रह किया था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद शुरु किए गए डिजिटल अभियान ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अपने अकाउंट बनाए हैं। साथ ही एक वेबसाइट भी लॉन्च की है। इस अभियान से करोड़ो लोग लगातार जुड़ रहे हैं। महज 6 दिन में ही कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर शुक्रवार सुबह 8 बजे तक 19.2 मिलियन (करीब 1.92 करोड़ लोग) जुड़ चुके थे। वहीं एक्स पर भी लाखों लोग उसे फॉलो कर रहे थे, लेकिन उसके हैंडल को भारत में सरकार ने बंद करा दिया है।

इंडियान एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक्स से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 (A) के तहत उस अकाउंट को रोकने के लिए कहा। वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को यह भी बताया कि ऐसा करने का इनपुट खुफिया विभाग से मिला था।

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इस अधिकारी ने बताया कि, “मंत्रालय को खुफिया विभाग से एक इनपुट मिला था, जिसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के एक्स अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए कहा गया था। खुफिया विभाग का कहना था कि यह अकाउंट भारत की संप्रभुता के लिए खतरा पैदा कर रहा है। खुफिया विभाग का मानना ​​था कि यह अकाउंट अपने माध्यम से भड़काऊ कंटेंट पोस्ट कर रहा था, जिससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी।”

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, इस तरह के ब्लॉकिंग आदेश एक गोपनीय प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं। “खास तौर पर, चिंता की वजह यह थी कि इस अकाउंट का कंटेंट युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा था।”

बता दें कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 (ए) केंद्र सरकार को संप्रभुता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था के हित में, या अपराधों के लिए उकसाने से रोकने के उद्देश्य से, सूचना तक जनता की पहुंच को प्रतिबंधित करने का अधिकार देती है। यह प्रक्रिया सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना तक पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 द्वारा नियंत्रित होती है। अवरुद्ध करने के आदेश गोपनीय होते हैं।

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हालांकि भारत में इस अकाउंट को रोक दिया गया है, लेकिन यह दूसरी जगहों से एक्सेस किया जा सकता है। गुरुवार शाम तक एक्स पर इसके 200,000 से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स थे। एक दूसरे सरकारी अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया कंपनी को यह ब्लॉकिंग ऑर्डर तब भेजा गया था, जब इस अकाउंट के लगभग 90,000 फ़ॉलोअर्स थे।

वहीं कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े इंस्टाग्राम हैंडल अभी तक भारत में ब्लॉक नहीं किया गया है, और शुक्रवार सुबह तक इसके गुरुवार तक इसके 19.2 मिलियन (1.92 करोड़) फ़ॉलोअर्स हो चुके थे।

लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, “एक अधिकारी ने बतायाहै कि इंस्टाग्राम अकाउंट को ब्लॉक किया जा सकता है और इस बाबत प्रक्रिया चल रही है।”

एक्स हैंडल ब्लॉक किए जाने पर कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने जानकारी साझा करते हुए लिखा था, ‘जैसी कि अपेक्षा थी, सरकार ने एक्स अकाउंट को भारत में ब्लॉक करा दिया है।’ लेकिन उन्होंने इसके साथ ही एक नया एक्स अकाउंट बना लिया और लोगों से उससे जुड़ने की अपील की है।

बता दें कि एक्स की गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी अकाउंट पर कोई अधिकारिक एजेंसी आपत्ति जताती है और इसके लिए वैध कारण बताती है तो उसे रोका जाता है।

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कॉकरोच जनता पार्टी का अभियान शुरु करने वाले अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और फिलहाल बॉस्टन में रहते हैं।

सिर्फ याद दिलाने के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने खुली अदालत में सुनवाई के दौरान कुछ लोगों को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहते हुए यह टिप्पणी की थी कि “जिन्हें रोजगार नहीं मिलता, वे मीडिया, सोशल मीडिया, एक्टिविस्ट या आरटीआई कार्यकर्ता बनकर व्यवस्था पर हमला करते हैं।” 

इसके बाद सीजेआई की इस टिप्पण का व्यापक विरोध हुआ था। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका इशारा फर्जी डिग्रीधारियों और अवसरवादियों की ओर था, न कि भारत के युवाओं की ओर। लेकिन तब तक यह बयान एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका था।

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