
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की पहासू नगर पंचायत में बूथ संख्या 307 और 311 की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (SIR के बाद प्रकाशित मतदाता सूची) में गंभीर गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। पठानटोला (आगर) और मालवीय नगर चपेटी - इन दो वार्डों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों ने मतदाता सूची की जांच के दौरान पाया कि उनके घरों के पते पर अलग-अलग इलाकों के हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के वोटरों के नाम जोड़ दिए गए हैं।
मालवीय नगर चपेटी के मकान नंबर 12 में रहने वाले साबिर मलिक के पते पर ड्राफ्ट लिस्ट में 14 लोगों के नाम दर्ज पाए गए। साबिर के भतीजे इमरान बताते हैं कि ‘इन नामों में एक नाम इमरान का है, वह अलीगढ़ की नई बस्ती में रहते हैं, लेकिन उनका नाम मालवीय नगर चपेटी के पते पर जोड़ दिया गया है।’ इमरान का कहना है कि दो-चार लोगों को छोड़कर वह बाकी नामों से परिचित नहीं हैं।
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इमरान के अनुसार, मकान नंबर 14 में केवल एक व्यक्ति रहता है, लेकिन ड्राफ्ट सूची में उस पते पर भी कई लोगों के नाम दर्ज हैं। इसी तरह इदरीस के मकान (नंबर 15) के पते पर 10 हिंदू वोटरों के नाम जोड़ दिए गए हैं, जिनमें से अधिकांश लोग पुराना डाकखाने वाली गली के निवासी हैं। इसी इलाके में महमूद के मकान के पते पर भी 12 वोटरों के नाम दर्ज पाए गए हैं।
मामले पर जब स्थानीय बीएलओ देवेंद्र से बात की गई तो उन्होंने कहा, “एक-दो दिन में आकर इसे ठीक कर दिया जाएगा।” वहीं बुलंदशहर के एसडीएम अरुण वर्मा ने नेशनल हेराल्ड से फोन पर बातचीत में इसे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की गलती मानने से इनकार किया। उनका कहना था कि बीएलओ से बात हो चुकी है और फॉर्म-8 के जरिए त्रुटियों को दुरुस्त कराया जाएगा।
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इस सवाल पर कि जब डेटा अपलोड बीएलओ ने ही किया, तो जिम्मेदारी किसकी है, एसडीएम ने दलील दी कि एन्युमरेशन फॉर्म में मकान संख्या का प्रावधान नहीं था और यह विवरण फॉर्म में पहले से छपा हुआ आया था। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या बीएलओ ने फॉर्म बिना देखे भरवा दिए, तो उनका जवाब था कि अब फॉर्म-8 के जरिए सुधार कराया जा रहा है।
इससे पहले समाजवादी पार्टी के पहासू नगर पंचायत अध्यक्ष सगीर अहमद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह बता रहे थे कि उनके मकान के पते पर वाल्मीकि समाज के लोगों के नाम जोड़ दिए गए हैं। समाजवादी पार्टी के नेता सगीर अहमद ने नेशनल हेराल्ड से बातचीत में कहा कि वह संबंधित लोगों को जानते हैं और सभी से बात हो चुकी है, जिनके नाम गलत पते पर दर्ज हैं, वे अपना पता ठीक करा रहे हैं।
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सगीर अहमद के अनुसार, उनके मकान नंबर 125 के पते पर वाल्मीकि समाज के 5-6 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं, जबकि एक दर्जन से अधिक मकानों में कुल 56 वोटरों के नाम जोड़े गए हैं। उनका दावा है कि उनके मोहल्ले के 200 मीटर के दायरे में वाल्मीकि समाज का कोई भी परिवार नहीं रहता, इसके बावजूद उनके नाम मोहल्ले के मकान नंबरों पर दर्ज कर दिए गए।
सगीर अहमद का कहना है कि जब उन्होंने अपने बीएलओ गजेंद्र सिंह से इस संबंध में बात की तो जवाब मिला कि यह एक “टेक्निकल गलती” है। वहीं एसडीएम ने भी स्वीकार किया कि “कहीं न कहीं गलती हुई है।” सगीर का आरोप है कि बीएलओ ने उनसे यह भी कहा, “आपने इतना हल्ला क्यों किया, हमें बता देते तो हम ठीक करा देते।”
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वह बताते हैं कि मामला सामने आने के बाद चकबंदी विभाग के सीईओ अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घर-घर जाकर सत्यापन करते हुए 56 संदिग्ध वोटों को चिन्हित किया। हालांकि सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले में किसी बीएलओ पर कोई कार्रवाई हुई? इस पर सगीर अहमद का साफ कहना है कि “अब तक कोई एक्शन नहीं हुआ है।”
नेशनल हेराल्ड ने जब बीएलओ गजेंद्र सिंह से इस संबंध में संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
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