
केंद्रीय गृह मंत्रालय को हर राज्य से जिलेवार धार्मिक आधार पर सांख्यिकीय बदलाव का डेटा चाहिए
जन्म, स्कूल, आधार-वोटर रजिस्ट्रेशन, गाड़ी, संपत्ति की खरीद-फरोख्त की जानकारी मांगी
हर जिले में बीते 15 साल में कितने मंदिर-मस्जिद-चर्च आदि बने
केंद्रीय गृह मंत्रालय की जनसांख्यिकीय बदलाव संबंधी उच्चस्तरीय समिति (हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंजेज़-एचएलसीडीसी) ने राज्य सरकारों से पिछले 15 वर्षों का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। द हिंदू अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, समिति जानना चाहती है कि इस दौरान अलग-अलग जिलों में जन्म पंजीकरण, स्कूलों में दाखिले, वाहन पंजीकरण और संपत्ति के लेनदेन में धर्म के आधार पर क्या बदलाव आए। लेकिन राज्य सरकारों के अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर विभाग इस तरह के आंकड़े नियमित रूप से तैयार या सुरक्षित नहीं रखते। ऐसे में समिति के सभी सवालों का जवाब देना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
एचएलसीडीसी का गठन इसी साल यानी 2026 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत किया गया है। इस कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर हैं। इस कमेटी को 'अवैध प्रवासन और अन्य असामान्य कारणों' से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों की स्टडी करने और उनसे निपटने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में 15 अगस्त को देश में 'अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलावों' का मुद्दा उठाया था।
द हिंदू की रिपोर्ट बताती है कि समिति की तरफ से भेजे गए सवालों का दायरा काफी व्यापक है। इसमें सिर्फ आबादी से जुड़े आंकड़े ही नहीं मांगे गए हैं, बल्कि ऐसे सरकारी रिकॉर्ड की भी धर्म के आधार पर विवरण की मांग की गई है जिन्हें आमतौर पर संकलित नहीं किया जाता है। इन सवालों में जन्म पंजीकरण, स्कूलों में दाखिले, वाहन पंजीकरण और संपत्ति की खरीद-फरोख्त जैसे रिकॉर्ड शामिल हैं। राज्यों ने बीते 15 वर्षों का जिलेवार रिकॉर्ड धर्म के आधार पर मुहैया कराने को कहा गया है।
राज्यों के अधिकारियों का कहना है कि इसी में मुश्किल है क्योंकि किसी भी विभाग के पास धर्म के आधार पर ऐसे आंकड़े नहीं होते हैं। अधिकारियों का कहना है कि राज्य के विभागों के पास जन्म, वाहन खरीद या पंजीकरण, संपत्ति की खरीद-फरोख्त का तो ब्योरा होता है, लेकिन धर्म के आधार पर इनका वर्गीकरण नहीं किया जाता है, और इन जानकारियों को इस स्वरूप में दर्ज भी नहीं किया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा करके उसे तैयार मांग अनुसार तैयार करना भी कठिन होगा।
समिति ने सभी राज्यों से मतदाता पंजीकरण और स्कूलों में दाखिलेों में असामान्य रुझानों की जानकारी भी मांगी है। सवाल में कहा गया है कि किन जिलों या क्षेत्रों में पंजीकरण की संख्या में असामान्य बढ़ोतरी दिखाई देती है और उसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। अधिकारियों के सामने इस संबंध में भी रिकॉर्ड की उपलब्धता और उनकी तुलना करने की चुनौती है। खासकर जहां पहले से पीढ़ीवार या धर्म के आधार पर जानकारी नहीं रखी गई, वहां किसी बदलाव की ठोस तस्वीर पेश करना आसान नहीं होगा।
इतना ही नहीं सभी जिलों में धार्मिक स्थलों का भी विस्तृत विवरण मांगा गया है। समिति जानना चाहती है कि पिछले 15 वर्षों में विभिन्न जिलों में कितने मंदिर, मस्जिद और चर्च जैसे धार्मिक ढांचे स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदायों में धर्मांतरण को लेकर किए गए अध्ययनों और खुफिया आकलनों का विवरण भी राज्यों से मांगा गया है।
इसके अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल विभिन्न क्षेत्रों की धार्मिक आबादी में आए बदलाव से जुड़ा है। समिति ने सीमावर्ती जिलों, आदिवासी इलाकों और संविधान की पांचवीं तथा छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर जानकारी मांगी है। पांचवीं अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्रों के प्रशासन और आदिवासी हितों की सुरक्षा के लिए विशेष संवैधानिक प्रावधान हैं। छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में स्वायत्त जिला परिषदों की व्यवस्था करती है। इन क्षेत्रों से जुड़ी जानकारी को समिति अपने अध्ययन में शामिल करना चाहती है।
अब राज्य सरकारों के सामने सवाल यह है कि वे केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति को कौन-से आंकड़े अपने मौजूदा रिकॉर्ड के आधार पर दे सकती हैं और किन सवालों के लिए जानकारी उपलब्ध ही नहीं है। समिति की रिपोर्ट कितनी विस्तृत होगी, यह काफी हद तक राज्यों से मिलने वाले आंकड़ों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने राज्यों को 35 सवालों की प्रश्नावली भेजी है।
समिति ने जिलों में हिरासत केंद्रों, जाली पहचान दस्तावेज़ों और बिना वैध दस्तावेज़ वाले प्रवासियों के संगठित अपराध, मानव तस्करी तथा नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों से कथित संबंधों की जानकारी भी मांगी है। इसके अलावा राज्यों से अनधिकृत प्रवासन और बसावट रोकने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा माँगा गया है।
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'द हिंदू' की रिपोर्ट को X पर शेयर करते हुए लिखा कि पैनल का एजेंडा "साफ़ तौर पर खतरनाक और दुर्भावनापूर्ण" है। उन्होंने कहा कि पैनल के सवालों से पहले से बनी हुई पूर्वाग्रह वाली सोच झलकती है और ऐसा लगता है कि नतीजे पहले ही तय कर लिए गए थे।
सवाल यह है कि किन जिलों या क्षेत्रों में पंजीकरण की संख्या में असामान्य बढ़ोतरी दिखाई देती है और उसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। अधिकारियों के सामने इस संबंध में भी रिकॉर्ड की उपलब्धता और उनकी तुलना करने की चुनौती है। खासकर जहां पहले से पीढ़ीवार या धर्म के आधार पर जानकारी नहीं रखी गई, वहां किसी बदलाव की ठोस तस्वीर पेश करना आसान नहीं होगा। और सबसे बड़ा सवाल कि आखिर इन आंकड़ों को हासिल कर केंद्र सरकार क्या करना चाहती है?