
डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि महापरिनिर्वाण दिवस पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संविधान की रक्षा को लोकतंत्र की मूल शर्त बताते हुए तीखे शब्दों में सरकार पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि जो लोग संविधान को कमजोर करना चाहते हैं, वे दरअसल लोकतंत्र खत्म कर एकतंत्र की स्थापना करना चाहते हैं। उन्होंने लिखा, देश का नारा होना चाहिए। जय जवान, जय किसान, जय संविधान। संविधान पर किसी तरह का पक्ष-विपक्ष नहीं होना चाहिए। देश को एक मत होकर खड़ा होना चाहिए।
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उन्होंने संसद में चल रही संविधान पर बहस को लोकतंत्र की दृष्टि से सबसे दुखद बताया। उनका कहना था कि संसद में संविधान को बचाने की चर्चा हो रही है, जबकि होना यह चाहिए कि संविधान के सिद्धांतों के आधार पर देश विकास का रास्ता चुने।
सपा प्रमुख ने संविधान को ‘लोकतंत्र का कर्म ग्रंथ’ और ‘संजीवनी’ बताते हुए कहा कि संविधान पर संकट का मतलब लोकतंत्र पर संकट है। उन्होंने चेताया कि जो संविधान को कमजोर करना चाहते हैं, वही लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करते हैं। हक छीनने वाले ही संविधान को नकारने की कोशिश करते हैं।
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अखिलेश यादव ने अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नीति को सीधे संविधान से जोड़ते हुए कहा कि संविधान पीडीए समाज का ‘प्रकाश स्तंभ’ है। यही दस्तावेज व्यक्ति की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करता है तथा शोषण से बचाता है। उनके अनुसार संविधान 90% शोषित-वंचित जनता का सबसे बड़ा सहारा है, इसलिए पीडीए वर्ग के लिए इसकी रक्षा जीवन-मरण का प्रश्न है।
अंत में उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा, “संविधान बचेगा तो न्याय बचेगा। न्याय रहेगा तो सभी को समान सम्मान और समान अवसर मिलेंगे। भेदभाव मिटेगा। इसलिए संविधान की रक्षा के लिए एक और करो या मरो आंदोलन की जरूरत है।
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