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पश्चिम एशिया में तनाव का असर! अप्रैल में घरेलू हवाई यात्री यातायात 2 प्रतिशत घटा

एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में उड़ान रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने और फ्यूल सरचार्ज के कारण हवाई किराए में वृद्धि से यात्री यातायात वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

मध्य पूर्व में तनाव के चलते देश में अप्रैल में घरेलू हवाई यात्री यातायात में सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की कमी देखने को मिली थी। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई। एविएशन सेक्टर पर जारी आईसीआरए की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक,भारत में अप्रैल 2026 में 1.40 करोड़ यात्रियों ने घरेलू उड़ान भरी थी, पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा 1.43 करोड़ था।

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मासिक आधार पर भी घरेलू हवाई यात्री यातायात में 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है, जो कि मार्च में 1.43 करोड़ था।

रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रैल 2026 में एयरलाइन क्षमता तैनाती में सालाना आधार पर 0.6 प्रतिशत की कमजोरी आई है और मार्च 2026 के मुकाबले 1.4 प्रतिशत की कमी आई है।

वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू स्तर पर 16.77 करोड़ यात्रियों ने उड़ान भरी थी। इसमें सालाना आधार पर मामूली 1.4 प्रतिशत की मजबूती आई है।

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भारतीय विमानन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री यातायात वित्त वर्ष 2026 के दौरान 3.9 प्रतिशत बढ़कर 3.5 करोड़ यात्रियों तक पहुंच गया, जो एजेंसी के पहले के 7-9 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान से कम है।

आईसीआरए ने कहा है कि उसने मार्च 2026 में भारतीय विमानन उद्योग के अपने दृष्टिकोण को "स्थिर" से संशोधित करके "नकारात्मक" कर दिया है। इसका कारण विमानन टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए के अवमूल्यन और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र की उपलब्धता में व्यवधान के कारण मुनाफे में संभावित कमजोरी है।

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एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में उड़ान रद्द होने, हवाई क्षेत्र बंद होने और फ्यूल सरचार्ज के कारण हवाई किराए में वृद्धि से यात्री यातायात वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

रिपोर्ट के अनुसार, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दिसंबर 2025 में लागू हवाई किराए की सीमा हटा दी है, फिर भी यदि टिकटों की कीमतों में तेजी से वृद्धि होती है तो मांग में कमी आ सकती है।

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रिपोर्ट के अनुसार, कुछ एयरलाइनों ने पश्चिम एशियाई संघर्ष से जुड़ी मांग में व्यवधान और बढ़ती लागतों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती की घोषणा पहले ही कर दी है।

आईसीआरए ने कहा कि इससे वित्त वर्ष 2026 के दौरान अंतरराष्ट्रीय सीट क्षमता हिस्सेदारी में देखी गई वृद्धि उलट सकती है।

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