कांग्रेस पार्टी ने गरुवार को मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार में 'प्रशासनिक भ्रष्टाचार' के 'संस्थागत' स्वरूप लेने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री मोहन यादव का इस्तीफा लेने की मांग की।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया में छपी उन खबरों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखकर यह मांग उठाई, जिनमें दावा किया गया है कि मुख्य सचिव अनुराग जैन ने एक बैठक में कथित तौर पर कहा कि 'कई बार मुख्यमंत्री कहते हैं कि बिना पैसे लिए कोई कलेक्टर काम नहीं करता'।
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जैन ने बुधवार को जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर समीक्षा बैठक की थी।
प्रमुख सचिव ने कथित तौर पर इसी दौरान भ्रष्टाचार और पैसों के लेन-देन से जुड़ा एक मामला साझा करते हुए उक्त टिप्पणी की थी।
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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में पटवारी ने कहा, "गंभीर प्रशासनिक पतन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से तत्काल इस्तीफा लिया जाए, क्योंकि उनके नेतृत्व में राज्य व्यवस्था पर नियंत्रण समाप्त होता दिख रहा है।"
पत्र की प्रति मीडिया से साझा करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा प्रमुख सचिव की टिप्पणी मध्य प्रदेश के 'प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के संस्थागत रूप और लेन-देन आधारित शासन' का प्रत्यक्ष संकेत है।
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उन्होंने कहा कि अगर यह कथन गलत या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है तब भी सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल स्थिति स्पष्ट करे, क्योंकि यह आरोप प्रदेश के शासन-प्रशासन की साख को गहराई से प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि यह महज एक टिप्पणी नहीं है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप है।
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पटवारी ने कहा कि मुख्य सचिव जैसे शीर्ष स्तर के अधिकारी की यह टिप्पणी दर्शाती है कि राज्य की जिला प्रशासन व्यवस्था में निर्णय पैसे के आधार पर हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं, ठेकों व कार्यों में 'लेन-देन' सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है।
उन्होंने कहा, "यह परिस्थिति सीधे-सीधे भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता तथा पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आती है, जो भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण कानूनों की गंभीर धाराओं के अंतर्गत जांच योग्य है।"
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से मध्यप्रदेश में '50 प्रतिशत कमीशन' के आरोप लगाती रही है लेकिन भाजपा सरकार इसे राजनीतिक आरोप बताकर टालती रही।
पटवारी ने कहा, "आज मुख्य सचिव के कथित बयान से यह शंका और प्रबल होती है कि राज्य में भ्रष्टाचार, केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि एक संरचित चैनल के रूप में कार्यरत है।"
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पटवारी ने दावा किया कि प्रदेश की जनता के बीच यह धारणा बलवती हो रही है कि यह पैसा सरकार के प्रभावशाली तंत्र, राजनीतिक संरक्षण और सत्ता-समर्थित बिचौलियों तक भी पहुंच रहा है।
उन्होंने पत्र के जरिए प्रधानमंत्री से मांग की कि मुख्य सचिव की टिप्पणी की सत्यता की पुष्टि कराई जाए तथा संबंधित वीडियो कॉन्फ्रेंस के रिकॉर्ड सार्वजनिक किये जाएं, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने साथ ही राज्य के सभी जिलों में जिला प्रशासन स्तर पर कथित भ्रष्टाचार व लेन-देन की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की और कहा कि इसके लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस संबंध में खबरों की प्रति 'एक्स' पर साझा करते हुए कहा कि मुख्य सचिव का बयान बीजेपी सरकार में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलती सच्चाई है।
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उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री जी, यह विपक्ष का आरोप नहीं, आपकी ही व्यवस्था की स्वीकारोक्ति है।"
सिंघार ने सवाल उठाया कि जब जिलों का संचालन करने वाले जिम्मेदार अधिकारी ही 'लेन-देन' की स्वार्थी प्रक्रिया में जकड़े हों तो आम जनता को न्याय, सेवा और पारदर्शिता कैसे मिलेगी?
उन्होंने कहा, "यह सुशासन नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का संस्थागत मॉडल है।"
नेता प्रतिपक्ष ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री यादव इस मामले में राजनीतिक संरक्षण से परे जाकर त्वरित निर्णय लेंगे और प्रदेश के नागरिकों को जवाबदेही व न्याय का भरोसा दिलाएंगे।
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