I-PAC छापा मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय ने गंभीर आरोप लगाया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया है कि कोलकाता में I-PAC से जुड़े उसके सर्च ऑपरेशन में ममता बनर्जी और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने जानबूझकर बाधा डाली। इसी मामले में ED ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए CBI जांच की मांग की है।
Published: undefined
ED ने अपनी याचिका में कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा जांच एजेंसियों के काम में हस्तक्षेप कोई अकेली घटना नहीं है। एजेंसी के अनुसार, जब भी किसी ऐसे मामले की जांच होती है, जिससे मुख्यमंत्री, उनके मंत्रियों, पार्टी कार्यकर्ताओं या करीबी अधिकारियों के खिलाफ सबूत मिलने की संभावना हो, तब राज्य पुलिस का इस्तेमाल कर जांच को रोका जाता है।
एजेंसी ने पश्चिम बंगाल की स्थिति को “चौंकाने वाली” बताते हुए कहा कि यहां कानून के रक्षक ही कथित तौर पर कानून तोड़ने में शामिल नजर आ रहे हैं।
Published: undefined
ED ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध सामने आने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है। एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर जैसे शीर्ष अधिकारी खुद गंभीर संज्ञेय अपराधों के आरोपी हैं, ऐसे में FIR दर्ज न होना कानून का खुला उल्लंघन है।
Published: undefined
ED के अनुसार, वह एक मल्टी-स्टेट मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है, जिसमें करीब 2742.32 करोड़ रुपये की अवैध कमाई का आरोप है। यह रकम कथित तौर पर अवैध कोयला खनन से जुड़ी है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
इसी जांच के तहत ED ने I-PAC के संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था। एजेंसी का कहना है कि उसके पास ऐसे दस्तावेज और सबूत थे, जो 20 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम से जुड़े हुए थे।
Published: undefined
ED ने आरोप लगाया कि छापे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल के डीजीपी, कोलकाता पुलिस कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।
एजेंसी के अनुसार, वहां मौजूद अधिकारियों को डराया-धमकाया गया और महत्वपूर्ण फाइलें व इलेक्ट्रॉनिक सबूत जबरन छीन लिए गए। ED का कहना है कि यह सामग्री PMLA कानून के तहत आधिकारिक तौर पर जब्त की गई थी।
एजेंसी ने यह भी दावा किया कि उसके अधिकारियों को आगे किसी तरह की तलाशी करने की अनुमति नहीं दी गई।
Published: undefined
ED ने कहा कि जब जांच एजेंसी से सबूत खुद मुख्यमंत्री और शीर्ष पुलिस अधिकारी छीनते हैं और यह सब मीडिया के सामने होता है, तो यह केवल एजेंसी का नहीं बल्कि संविधान और कानून के शासन का सार्वजनिक अपमान है। एजेंसी के मुताबिक, इससे संवैधानिक मूल्यों को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
Published: undefined
ED का तर्क है कि चूंकि मुख्यमंत्री खुद गृह मंत्री भी हैं और वही अधिकारी इस मामले में आरोपी बताए जा रहे हैं, इसलिए स्थानीय पुलिस से FIR दर्ज कराना व्यर्थ होगा। एजेंसी को आशंका है कि राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामले को कमजोर करने का प्रयास करेगी।
Published: undefined
ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट की कार्यवाही का भी जिक्र किया। एजेंसी का आरोप है कि मुख्यमंत्री समर्थकों ने अदालत परिसर में हंगामा किया, जिसके कारण हाईकोर्ट को यह कहते हुए सुनवाई टालनी पड़ी कि माहौल अनुकूल नहीं है।
ईडी का दावा है कि पार्टी कार्यकर्ताओं को व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए बड़ी संख्या में अदालत पहुंचने के लिए कहा गया था।
Published: undefined
ED ने ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं का हवाला दिया है, जिनमें घर में घुसकर चोरी, सरकारी काम में बाधा और सबूत नष्ट करने जैसे आरोप शामिल हैं।
एजेंसी का कहना है कि इससे पहले भी ऐसा देखा गया है कि जांच एजेंसियों के खिलाफ कई FIR दर्ज कर उन्हें डराने की कोशिश की जाती है।
Published: undefined
ED ने आरोप लगाया कि इस मामले में FIR की आड़ में राज्य पुलिस ने वह CCTV कैमरा भी उठा लिया, जिसमें कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियां रिकॉर्ड थीं। एजेंसी के मुताबिक, यह भी सबूत नष्ट करने की श्रेणी में आता है।
Published: undefined
एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि यह मामला असाधारण है और इसमें शीर्ष अदालत का हस्तक्षेप जरूरी है। एजेंसी का कहना है कि अगर इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में कोई भी राजनीतिक नेता खुलेआम कानून अपने हाथ में लेने से नहीं हिचकेगा।
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined