
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस कांफ्रेंस करके मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि इस देश में नोटबंदी, जीएसटी बंदी, कोरोना बंदी, सिलेंडर बंदी, आभूषण बंदी... केवल सांस बंदी बची है।
उन्होंने कहा कि 22 अप्रैल 2024 को राजस्थान के बांसवाड़ा में पीएम मोदी ने देश की बहनों, बेटियों और माताओं को कहा था यह जीत गए तो आपका मंगलसूत्र छीन लेंगे। ठीक 2 साल बाद, 10 मई 2026 को पीएम मोदी ने तेलंगाना में देश की बहनों, माताओं और बेटियों को कहा कि एक साल तक सोने के गहने न खरीदें और सोना खरीदना बंद कर दें। अब पता चला कि हिंदुस्तान की बहनों, बेटियों और माताओं के आभूषण छीनने का असली प्लान क्या था।
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उन्होंने कहा कि देश का 90% से अधिक ज्वेलरी उद्योग छोटे-छोटे दुकानदार, सुनार, एमएसएमई सेक्टर में हैं और इसमें 3.5 करोड़ लोग लगे हैं... 3.5 करोड़ लोगों को देश का स्वर्ण आभूषण उद्योग रोजगार देता है, प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों तरीकों से। 10 मई 2026 को सोने के गहने न खरीदने का मोदी सरकार का फरमान 3.5 करोड़ से अधिक छोटे-छोटे ज्वेलरों, सुनारों, दुकानदारों, व्यापारियों, कारीगरों, कामगारों... इन सबके लिए तबाही का फरमान साबित हुआ है। सत्ता के शीर्ष से पिछड़े वर्गों के इन मेहनतकश वर्मा, सुनार, स्वर्णकार समाज पर, उनके करोड़ों साथियों पर रोजी-रोटी मिटाने वाला यह एक भयानक हमला किया गया है।
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उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं अब 13 मई 2026 को एक और ज्वेलरी उद्योग विरोधी वज्रपात गिराते हुए मोदी सरकार ने सोने और चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर डाली। मतलब, एक तरफ तो सोना और सोने के आभूषण न खरीदने का फरमान देकर 3.5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी पर लात मार दी, तो दूसरी ओर सोने की तस्करी करने वाले तस्कर माफियाओं के लिए काली और मोटी कमाई और मलाई का रास्ता खोल दिया। इसलिए मोदी सरकार से हमारे पांच सवाल हैं।
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पहला, क्या नोटबंदी की तरह अब उद्यमबंदी भी न्यू नॉर्मल है बीजेपी का? दूसरा, क्या प्रधानमंत्री और बीजेपी सरकार सार्वजनिक मंच से सोने के गहने न खरीदने की अपील करने से जो ज्वेलरी सेक्टर को भारी नुकसान होगा, 3.5 करोड़ लोगों का जो रोजगार जाएगा, उनके लिए आपने क्या सोचा है? क्या ज्वेलरी सेक्टर से जुड़े 3.5 करोड़ स्वर्णकारों, वर्मा, सुनारों, कामगारों, दुकानदारों... उनके लिए कोई प्लान बीजेपी सरकार के पास है, राहत का पैकेज देने का? तीसरा, अगर गोल्ड इंपोर्ट कम करना ही आपका मकसद है, तो सरकार को देश में गोल्ड ज्वेलरी की डिमांड सप्रैशन करने की बजाय, देश में पहले से ही जो मौजूद सोना है, उसकी आप गोल्ड मोबिलाइजेशन करके बुलियन बैंकिंग फ्रेमवर्क बनाने की नीति पर काम क्यों नहीं कर रहे? हम अल्टरनेटिव भी बता रहे हैं। देश में बहुत सारा सोना लॉकर्स में आइडल पड़ा है। देश में सोना है, तो आप उसका मोबिलाइजेशन करिए और एक बुलियन बैंकिंग फ्रेमवर्क क्रिएट करिए। आप क्यों नहीं कर रहे मोदी जी और बीजेपी ऐसा?
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चौथा, क्या यह सही नहीं कि एक तरफ प्रधानमंत्री जी सलाह देते हैं लोगों को—'भैया, सोने के जेवर मत खरीदो एक साल तक', दूसरी तरफ मोदी सरकार सोना खरीद रही है? पांचवां क्या अब 90% एमएसएमई छोटे दुकानदारों से जुड़ा ज्वेलरी उद्योग भी अगले एक साल में तालाबंदी का शिकार हो जाएगा? क्या ज्वेलरी सेक्टर के इन छोटे-छोटे एमएसएमई के लोगों को साफ कर, अब ज्वेलरी सेक्टर भी दो या तीन उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी हो रही है? यह है असली बात, क्योंकि लाखों करोड़ का ज्वेलरी सेक्टर है। अगर दो उद्योगपतियों ने कब्जा कर लिया तो उनका धंधा हो जाएगा और यह सब 3.5 करोड़ लोग, जिनके नुमाइंदे यहां बैठे हैं, यह सब उनके गुलाम हो जाएंगे। क्या तैयारी असल में यह है?
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सुरजेवाला ने आगे कहा कि पिछले 12 साल से मोदी सरकार का जो साइकिल ऑफ लूट है—पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, कमर्शियल गैस, छोटू सिलेंडर, सीएनजी, इन सबको लेकर वह बदस्तूर जारी है। 11 साल से मोदी सरकार ने हिंदुस्तान के लोगों से 43 लाख करोड़ रुपये पेट्रोल-डीजल से लूटे हैं। यानी 1,000 करोड़ हर रोज।
उन्होंने कहा कि पहले सरकार कहती थी कि स्थिति काबू में हैं और जैसे ही चुनाव खत्म हो गए, सरकार कहती है ये मत खरीदिए, वो मत करिए, क्या सरकार चुनाव का इंतजार कर रही थी?
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