
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में संकट के कारण भारत में एलपीजी गैस की सप्लाई प्रभावित होना शुरू हो गई है। इसी कारण पुणे शहर में गैस से चलने वाले कई दाह संस्कार घाट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। पुणे महानगरपालिका के अनुसार शहर में गैस से चलने वाले करीब 18 श्मशान घाट हैं, जिनकी गैस भट्टियां फिलहाल बंद हैं।
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पेट्रोलियम मंत्रालय ने 5 मार्च को एक आदेश जारी कर घरेलू एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता देने को कहा था। मंत्रालय ने घरेलू एलपीजी खपत के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन सप्लाई को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। इसके बाद पुणे महानगरपालिका ने शहर के गैस क्रिमेटोरियम अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया। अभी अंतिम संस्कार के लिए इलेक्ट्रिक भट्टियों और लकड़ी की चिताओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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पुणे नगर निगम के आयुक्त नवल किशोर राम ने कहा, "श्मशान घाट के सिस्टम में कोई दिक्कत नहीं हुई है, या इसमें कोई रुकावट नहीं है। शहर में हमारे पास लगभग 27 श्मशान घाट हैं, जिनमें सभी सुविधाएं हैं। उनमें से 18 में एलपीजी का इस्तेमाल होता है। सप्लाई में रुकावट के कारण, हम इन 18 जगहों पर कमर्शियल एलपीजी के इस्तेमाल को रोक रहे हैं ताकि कमी न हो। लेकिन हमारे पास दूसरी सुविधाएं भी हैं। कुछ श्मशान घाटों पर लोड ज़्यादा है, जबकि कुछ पर कम। हम यह पक्का करेंगे कि लोग सभी उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करें और श्मशान घाटों के इस्तेमाल में बैलेंस बनाने की कोशिश करेंगे।"
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पुणे के नवीन पेठ में स्थित वैकुंठ धाम पुणे का सबसे बड़ा श्मशान घाट माना जाता है। करीब 17 एकड़ में फैले इस परिसर में रोज औसतन 20 अंतिम संस्कार होते हैं। यहां मौजूद तीन गैस भट्टियां फिलहाल बंद कर दी गई हैं क्योंकि गैस का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है और सिर्फ दो अंतिम संस्कार के लिए ही गैस बची है। फिलहाल यहां पांच इलेक्ट्रिक भट्टियां और प्रदूषण नियंत्रण के साथ लकड़ी से अंतिम संस्कार की व्यवस्था चालू रखी गई है।
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इसके अलावा पुणे महानगरपालिका के कई अन्य गैस श्मशान घाट भी इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। वैकुंठ श्मशानभूमि के अलावा विश्रांतवाडी, कोरेगांव पार्क, औंध, कात्रज, हडपसर और सदाशिव पेठ जैसे इलाकों के गैस श्मशान घाट भी बंद कर दिए गए हैं। शहर में करीब 18 से 20 गैस से चलने वाले श्मशान घाट इस समय बंद हैं। अब अधिकतर जगहों पर इलेक्ट्रिक भट्टियों या लकड़ी की चिता से अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। इसके कारण कुछ जगहों पर लोगों को इंतजार भी करना पड़ रहा है।
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