
कभी भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक रहे कोयंबटूर और तिरुपुर इस समय अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद यहां की फैक्ट्रियों, कामगारों और निर्यात पर गहरा असर पड़ा है। ये दोनों शहर मिलकर तमिलनाडु और अन्य राज्यों के लाखों लोगों को रोजगार देते थे। लेकिन अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत किए जाने के बाद से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
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उद्योग जगत के सूत्रों के अनुसार, अनुमान है कि कपड़ा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। अगर कास्टिंग, पंप और औद्योगिक वाल्व जैसे सहायक उद्योगों को भी शामिल किया जाए, तो प्रभावित लोगों की संख्या तीन लाख से ज्यादा हो सकती है। कई छोटी और मझोली फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। कई जगहों पर काम के घंटे कम कर दिए गए हैं और नए ऑर्डर भी तेजी से घट रहे हैं। इसका सीधा असर निर्यात पर भी पड़ा है।
एक निजी मिल में परिधान निर्यात और व्यापार विकास के उपाध्यक्ष धनबालन के अनुसार, पहले कोयंबटूर और तिरुपुर से अमेरिका को हर साल करीब 1.7 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात होता था। अब यह आंकड़ा लगभग एक अरब डॉलर कम हो चुका है। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहता है, तो आने वाले एक साल में अमेरिका को कपड़ा निर्यात लगभग पूरी तरह बंद हो सकता है।
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उद्योग जगत का कहना है कि समस्या सिर्फ 50 प्रतिशत टैरिफ तक सीमित नहीं है। इसके अलावा अन्य शुल्क भी लगाए जाते हैं, जिससे अंतिम कीमत और ज्यादा बढ़ जाती है, जिसे डिलीवर ड्यूटी पेड (डीडीपी) कीमत कहा जाता है। इस वजह से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद बहुत महंगे हो जाते हैं। वहीं चीन और बांग्लादेश जैसे देश लगभग 30 प्रतिशत कम लागत में अपने सामान बेच पा रहे हैं, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ गई है।
वहीं, अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है क्योंकि खबरें हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उन देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं, जो रूस से तेल खरीदना जारी रखते हैं। धनबालन ने कहा कि जब 50 प्रतिशत टैरिफ ही झेलना मुश्किल है, तो 500 प्रतिशत टैरिफ की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिका को निर्यात और भी घटेगा और बेरोजगारी तेजी से बढ़ेगी।
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अमेरिकी बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच निर्यातक अब भारत सरकार और उद्योग संगठनों से नए बाजारों पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। धनबालन के अनुसार, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन को अब प्राथमिक बाजार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योगों के अस्तित्व के लिए अब बाजारों में विविधता लाना बेहद जरूरी हो गया है। वैश्विक व्यापार में बढ़ते तनाव के बीच कोयंबटूर और तिरुपुर के लाखों कामगारों का भविष्य इस समय गंभीर संकट में नजर आ रहा है।
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