
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शन करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है और सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात जाम, आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही एवं महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को देखते हुए किसी सड़क को स्थायी प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए था।
दिल्ली के पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने स्वाति सिंह की एक अलग याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित एक समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद लिया गया। हलफनामे के अनुसार, समिति के सभी सदस्यों ने जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शनों के लिए अनुपयुक्त पाया था।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि यह फैसला एक अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय के नौ अक्टूबर के आदेश के तहत नहीं लिया गया था, क्योंकि निर्धारित प्रदर्शन स्थल को बदलने का प्रस्ताव काफी समय से सरकार के विचाराधीन था। हलफनामे के अनुसार, समिति का गठन 26 अगस्त को किया गया था और उसकी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय के नौ अक्टूबर के आदेश से काफी पहले सितंबर में ही गृह मंत्रालय को मिल गई थी।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि जंतर मंतर पर हर साल 1,300 से अधिक विरोध प्रदर्शन होते हैं, जबकि वहां अधिकतम करीब 1,500 लोगों के एकत्र होने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से अक्सर एम्बुलेंस और दमकल वाहनों जैसी आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही बाधित होती है और भगदड़ का खतरा भी बना रहता है।
हलफनामे में कहा गया कि जंतर-मंतर से करीब तीन से चार किलोमीटर के दायरे में 78 विदेशी दूतावास, राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के कार्यालय स्थित हैं। इसके अलावा, आसपास भारतीय रिजर्व बैंक सहित केंद्र सरकार, विभिन्न मंत्रालयों और स्वायत्त संस्थानों के 99 कार्यालय हैं, जहां प्रतिदिन करीब 1.46 लाख लोगों का आना-जाना होता है।
हलफनामे के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 7,017 निजी आवासीय इकाइयां हैं, जिनमें लगभग 36,685 लोग रहते हैं। इसके अलावा, 5,349 सरकारी आवासीय इकाइयों में करीब 27,881 लोग रहते हैं। इसके अनुसार, विरोध प्रदर्शनों और यातायात जाम के कारण इन लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित होता है।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि एक से 27 अगस्त के बीच जंतर-मंतर के संबंधित हिस्से से मदद के लिए करीब 250 फोन आए, मोटर वाहनों की चोरी समेत अन्य ऐसे मामलों में 119 प्राथमिकी दर्ज की गईं, संपत्ति के नुकसान से जुड़े 254 से अधिक दावे सामने आए और सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन, दंगे एवं संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में 23 प्राथमिकी दर्ज की गईं।
समिति ने विरोध प्रदर्शनों के लिए मध्य दिल्ली के रामलीला मैदान, पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के बुराड़ी मैदान को वैकल्पिक स्थलों के रूप में इस्तेमाल करने की सिफारिश की। हलफनामे में कहा गया कि इन वैकल्पिक स्थलों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का इस्तेमाल करने के साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की निर्बाध आवाजाही भी बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकती है।