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झारखंड: आंदोलनकारी छात्रों के साथ आज तीसरे दौर की वार्ता, छात्र बोले- मांगें पूरी होने के पहले नहीं हटेंगे

छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि अब केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। छात्र प्रतिनिधि रवींद्र कुमार पासवान और जेएलकेएम गुट के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि सरकार को मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन देना होगा।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच तीसरे दौर की औपचारिक वार्ता रविवार दोपहर 12 बजे होगी।

इससे पहले हुई दो दौर की बातचीत बेनतीजा रही है। सरकार की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर चार सदस्यीय मंत्रियों की समिति ने छात्रों के अलग-अलग गुटों और संगठनों से शुक्रवार और शनिवार को बातचीत की। समिति में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, चमरा लिंडा और संजय प्रसाद यादव शामिल हैं। पिछले दो दिनों में अलग-अलग स्तर पर पांच दौर की बातचीत हो चुकी है। इसके बावजूद मुख्य मांगों पर गतिरोध कायम है।

छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि अब केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन खत्म नहीं होगा। छात्र प्रतिनिधि रवींद्र कुमार पासवान और जेएलकेएम गुट के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि सरकार को मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन देना होगा। छात्रों का कहना है कि सभी मांगों पर लिखित निर्णय के बिना वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे। छात्र मुख्य रूप से 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा रेगुलर एवं बैकलॉग, 2024 की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करने, टीडीपीएल एजेंसी की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द कर सीबीआई जांच कराने और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए दोनों आयोगों की व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जाएं। इस बीच सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर छात्रों और राज्यभर के युवाओं से सुझाव भी मांगे हैं। इसके लिए सरकार की ओर से ईमेल के माध्यम से सुझाव भेजने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र इसे मुख्य मांगों का विकल्प नहीं मान रहे हैं।

छात्रों ने सरकार को रविवार तक ठोस निर्णय लेने का समय दिया है। उनका कहना है कि अगर दोपहर 12 बजे होने वाली वार्ता में लिखित और संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो 10 अगस्त को पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इसके अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 11 अगस्त को अलग से विधानसभा मार्च का ऐलान किया है। ऐसे में अगले 24 से 36 घंटे सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच जारी गतिरोध के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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