हालात

जस्टिस यशवंत वर्मा जांच समिति का पुनर्गठन, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बदला पैनल का एक सदस्य

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया है। नई समिति 6 मार्च से प्रभावी होगी।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति का पुनर्गठन कर दिया है। लोकसभा सचिवालय की ओर से 25 फरवरी को जारी अधिसूचना के मुताबिक, पुनर्गठित समिति 6 मार्च से प्रभावी होगी।

लोकसभा सचिवालय द्वारा बुधवार को जारी एक अधिसूचना के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस अरविंद कुमार पुनर्गठित समिति के अध्यक्ष होंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य सदस्य होंगे।

Published: undefined

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पुनर्गठित पैनल 6 मार्च से प्रभावी होगा। यह कदम मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन श्रीवास्तव की निर्धारित सेवानिवृत्ति के बाद उठाया गया है, जो अगस्त 2025 में संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग नोटिस भेजे जाने के बाद गठित मूल तीन सदस्यीय समिति का हिस्सा थे। उनके स्थान पर बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर को पैनल में शामिल किया गया है, जबकि अध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस अरविंद कुमार और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य सदस्य के रूप में बने रहेंगे।

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी का लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा पुनर्गठन कर दिया गया है। 25 फरवरी को लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, कमेटी के तीन सदस्यों में से एक, मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मणिंद्र मोहन श्रीवास्तव 6 मार्च को रिटायर होने वाले हैं। उनकी जगह अब बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर को शामिल किया गया है। यह जांच समिति पिछले साल अगस्त में बनाई गई थी, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 152 सांसदों ने उस समय दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था।

Published: undefined

पिछले साल अगस्त में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 152 सांसदों ने उस समय दिल्ली उच्च न्यायालय में कार्यरत रहे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव स्वीकार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था, हालांकि जस्टिस वर्मा ने समिति की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे 16 जनवरी को खारिज कर दिया गया। इसके बाद वह समिति के समक्ष पेश हुए और अपना पक्ष रखा।

विवाद की शुरुआत 15 मार्च 2024 की रात दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना से हुई थी। आग बुझाने के दौरान स्टोर रूम से जली हुई नकदी बरामद हुई थी, जिसके वीडियो सामने आए थे। उस समय जस्टिस वर्मा भोपाल में थे। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि बरामद धनराशि का उनसे या उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है।

Published: undefined

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

Published: undefined