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पेट्रोल-डीज़ल कीमतों का कर्नाटक कनेक्शन, चुनाव के चलते 2 सप्ताह से नहीं बढ़े दाम   

कर्नाटक में चुनाव हैं, इसलिए पिछले दो सप्ताह से पेट्रोल-डीज़ल के दाम नहीं बढ़े हैं। माना जा रहा है कि 12 मई को कर्नाटक में मतदान होते ही दाम बढ़ना तय हैं। पिछले साल गुजरात चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था।

नवजीवन ग्राफिक्स
नवजीवन ग्राफिक्स 

पेट्रोल-डीज़ल के दाम स्थिर हैं। पिछले 24 अप्रैल से यानी दो सप्ताह से तेल के दाम नहीं बढ़े हैं, और बेंग्लुरु और दिल्ली समेत देश के ज्यादातर शहरों में तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 17 जून 2017 से तेल कीमतों की हर दिन समीक्षा की जाती रही है, और उसी आधार पर दाम ऊपर-नीचे होते रहे हैं। लेकिन अब पहली बार ऐसा हुआ है जब तेल के दामों में करीब दो हफ्ते से कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पेट्रोल महंगा हुआ, लेकिन भारत में इसका असर नहीं दिखा, जबकि घरेलू रिटेल में कीमतें तय करने में ये एक बड़ा फैक्टर होता है।

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वैसे 24 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 78.84 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब 80 डॉलर पर पहुंच गई है, लेकिन भारत में इसका कोई असर नहीं हुआ है। गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2018 को दिल्ली में पेट्रोल 55 महीने के उच्च स्तर 74.02 रुपए पर और डीजल अब तक के सबसे उच्च स्तर 65.18 रुपए पर पहुंच गया था, जो अभी भी बना हुआ है। इसके अलावा 24 अप्रैल से कीमतों में बदलाव न होना भी एक रिकॉर्ड है। कर्नाटक की राजधानी बेंग्लुरु में भी 24 अप्रैल से कीमतें 75.82 और 67.05 पर स्थिर हैं।

उधर तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार पर दबाव बना था कि एक्साइज ड्यूटी घटाई जाए, लेकिन सरकार ने इससे साफ इनकार कर दिया। वित्त मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि अब भाव और ज्यादा ऊपर नहीं जाता है तो एक्साइज में कटौती की कोई वजह नहीं बनती। वैसे गणित यह है कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी अगर 1-1 रुपए घटाई जाती है तो सरकार को मौजूदा 13,000 करोड़ रुपए के राजस्व का घाटा होगा। सरकार का तर्क है कि तेल की कीमतें 1-2 रुपए बढ़ने से महंगाई पर असर नहीं पड़ेगा। उधर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डालते हुए कहा था कि अगर राज्य अपना टैक्स घटाएंगे तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

ध्यान रहे कि इस वक्त पेट्रोल पर 19.48 रुपए और डीजल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगती है। इसके अलावा राज्यों के टैक्स और डीलर कमीशन शामिल होने के बाद इतने महंगे दाम में तेल उपभोक्ताओं को मिलता है।

गौरतलब है कि पिछले साल गुजरात चुनाव से पहले सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 15 दिन तक लगातार 1 से 3 पैसे की कटौती की थी। गुजरात में पिछले साल 14 दिसंबर को विधानसभा चुनाव हुए थे। इससे पहले अक्टूबर में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में भी 2 रुपए की कटौती की थी।

ऐसे में माना जा रहा है कि 12 मई को कर्नाटक में मतदान होने के बाद तेल की कीमतों में उछाल आएगा, क्योंकि गुजरात चुनाव के बाद भी ऐसा हुआ था। गुजरात में 14 दिसंबर 2017 को वोटिंग के बाद वहां तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाने शुरू कर दिए थे।

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इस दौरान यह भी चर्चा रही कि केंद्र सरकार ने तेल मार्केटिंग कंपनियों को कीमतें नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, कंपनियों और सरकार ने इस तरह के निर्देशों की बात से साफ इनकार कर दिया था।

आपको याद होगा कि नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच कच्चा तेल सस्ता होने पर भी घरेलू बाजारों में तेल के दाम नहीं घटे थे, क्योंकि सरकार ने 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई और खूब राजस्व कमाया। आंकड़े बताते हैं कि 2016-17 के दौरान तेल पर एक्साइज ड्यूटी से सरकार को 2.42 लाख करोड़ रुपए मिले जो कि 2014-15 के 99 हजार करोड़ की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हैं।

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