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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस ने पांचों सीटें जीती, बीजेपी को दो सीट मिली, JDS प्रत्याशी की हार

इस परिणाम को बीजेपी-जेडी(एस) गठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया था और डी.के. शिवकुमार को चुनौती दी थी, ऐसे में जेडी(एस) उम्मीदवार की हार उनके लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस ने पांचों सीटें जीती, बीजेपी को दो सीट मिली, JDS प्रत्याशी की हार
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव: कांग्रेस ने पांचों सीटें जीती, बीजेपी को दो सीट मिली, JDS प्रत्याशी की हार फोटोः IANS

कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे गुरुवार को घोषित कर दिए गए। चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी को महज दो सीटें ही मिलीं। वहीं, एनडीए की सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस को इस चुनाव में अपेक्षा से 11 अतिरिक्त वोट मिले। बताया जा रहा है कि पार्टी के पक्ष में बीजेपी के तीन विधायकों और जेडी(एस) के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।

इस परिणाम को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता और बीजेपी-जेडी(एस) गठबंधन के लिए झटका माना जा रहा है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया था और डी.के. शिवकुमार को चुनौती दी थी, ऐसे में जेडी(एस) उम्मीदवार की हार उनके लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है।

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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस के पांच उम्मीदवारों की जीत नहीं, बल्कि राज्य की जनता की जीत है और इससे कर्नाटक की राजनीति में नया अध्याय शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद, वरिष्ठ नेता बी.एस. शिवन्ना, टिप्पन्नप्पा कामकनूर, एआईसीसी सचिव पी.वी. मोहन और कांग्रेस कोषाध्यक्ष विनय कार्तिक पहले ही दौर की मतगणना में विजयी घोषित हो गए।

सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस के पास 135 विधायकों, एक एसकेपी सदस्य और दो निर्दलीय विधायकों सहित कुल 138 विधायकों का समर्थन था, लेकिन अंततः पार्टी के उम्मीदवारों को 151 विधायकों का समर्थन मिला, जो अनुमान से 11 वोट अधिक है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के पास दो निर्दलीय सदस्यों सहित 64 विधायकों का समर्थन था, लेकिन उसे केवल 56 प्रथम वरीयता मत मिले, जबकि बीजेपी का एक वोट अमान्य घोषित हो गया। वहीं, 18 सदस्यीय जेडी(एस) को केवल 14 वोट मिले।

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बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवार लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य की जीत पर उन्हें खुशी है, लेकिन मतदान के पैटर्न से यह स्पष्ट हुआ है कि पार्टी के तीन वोट कांग्रेस के पक्ष में चले गए। उन्होंने कहा कि ऐसे विधायकों की पहचान कर पार्टी उचित कार्रवाई करेगी।

मतगणना में कांग्रेस उम्मीदवार बी.के. हरिप्रसाद, टिप्पन्नप्पा कामकनूर, पी.वी. मोहन और बी.एस. शिवन्ना को 30-30 वोट मिले, जबकि विनय कार्तिक को 32 वोट प्राप्त हुए। बीजेपी के रघु कौटिल्य को 29 और लिंगराज पाटिल को 27 वोट मिले। जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 वोट हासिल हुए।

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जीत के बाद कांग्रेस उम्मीदवार टिप्पन्नप्पा कामकनूर ने पार्टी नेतृत्व, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य नेताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री प्रियंक खड़गे का समर्थन नहीं मिलता तो उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिलता। उन्होंने उद्योग मंत्री एम.बी. पाटिल और उत्तर कर्नाटक के अन्य नेताओं का भी धन्यवाद किया। कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक को 32 वोट मिले, जो पार्टी के अन्य चार उम्मीदवारों से अधिक हैं।

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चुनाव में कांग्रेस को कुल 11 अतिरिक्त वोट मिले। निष्कासित बीजेपी विधायक शिवराम हेब्बार और एस.टी. सोमशेखर के अलावा बीजेपी के तीन अन्य विधायक और जेडी(एस) के छह विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाले बताए जा रहे हैं। प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 27.63 वोटों की आवश्यकता थी।

बीजेपी उम्मीदवार लिंगराज पाटिल को पहले दौर में केवल 27 वोट मिले थे और वह आवश्यक संख्या तक नहीं पहुंच सके थे। हालांकि, जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू के बाहर होने के बाद मतों के स्थानांतरण से वह अंततः विजयी हो गए। चुनाव में कुल 222 वोट पड़े, जिनमें से एक मत अमान्य घोषित किया गया, क्योंकि मतदाता ने वरीयता क्रम सही तरीके से अंकित नहीं किया था।

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