
केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा धाम “हर-हर महादेव” और “जय बाबा केदार” के जयघोष से गूंज उठा और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
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कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए। ठंडे मौसम और कठिन पहाड़ी रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। कई भक्त तो रात से ही लाइन में लगकर बाबा केदारनाथ के दर्शन का इंतजार करते रहे। मंदिर के गर्भगृह में पंचमुखी स्वयंभू शिवलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती संपन्न की गई।
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श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा सुविधा और रूट मैनेजमेंट के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए हर स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
इसके साथ ही हेलीकॉप्टर सेवा, पैदल मार्ग और घोड़ा-खच्चर सेवाओं को भी सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है। इस मौसम मौसम अनुकूल रहने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे और अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
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छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद अक्षय तृतीया के अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट रविवार को खोले गए थे। उत्तरकाशी जिले में स्थित इन मंदिरों में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर की गई, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेकर देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
इस वर्ष एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। गंगोत्री मंदिर समिति ने गैर-सनातनियों के लिए ‘पंचगव्य’ ग्रहण करना अनिवार्य किया है, जबकि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सनातन धर्म में आस्था की पुष्टि करने वाला शपथ पत्र (एफिडेविट) जमा करना जरूरी किया है।
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इस साल अब तक करीब 19 लाख श्रद्धालु चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। पिछले साल 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इस यात्रा में हिस्सा लिया था।
केदारनाथ धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी माना जाता है।
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कपाट खुलने के साथ ही पूरा केदारघाटी क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया है। चारों ओर बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच गूंजते मंत्र और जयकारे इस पवित्र धाम की दिव्यता को और भी बढ़ा रहे हैं।
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