
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि निजी कॉरपोरेट निवेश में तेजी का अभाव देश के सामने सबसे गंभीर चुनौती है और आर्थिक शक्ति का बढ़ता केंद्रीकरण निवेश वृद्धि को प्रभावित कर रहा है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि अब ‘‘राजनीतिक संरक्षण प्राप्त’’ निजी निवेश ही व्यापक निजी निवेश को पीछे धकेल रहा है।
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जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा की, जिसमें कहा गया है कि 31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत के कुल निजी पूंजीगत व्यय का एक-तिहाई हिस्सा अकेले अडानी समूह का था।
उन्होंने कहा, ‘‘निजी कॉरपोरेट निवेश में तेजी का अभाव भारत की सबसे गंभीर चुनौती है। इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें वास्तविक मजदूरी में ठहराव शामिल है, जिससे सभी आय वर्गों में उपभोग वृद्धि प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, ऊंची महंगाई दर के कारण घरेलू बचत दर में भी तेज गिरावट आई है।’’
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कांग्रेस नेता का कहना है कि निजी कॉरपोरेट निवेश में सुस्ती का एक कारण प्रवर्तन एजेंसियों, कर अधिकारियों और जांच एजेंसियों के ‘‘रेड राज’’ से पैदा हुआ भय और दबाव का माहौल भी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि निवेश संबंधी प्रमुख नीतियों में निरंतरता और पारदर्शिता का अभाव तथा चीनी आयात में लगातार वृद्धि, जिसने घरेलू विनिर्मित वस्तुओं के बाजार को नुकसान पहुंचाया है, भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
रमेश ने कहा कि आर्थिक शक्ति का बढ़ता केंद्रीकरण भी निवेश वृद्धि को हतोत्साहित कर रहा है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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