
देश में स्वाइन फ्लू के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और अभी भी ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। स्वाइन फ्लू का सबसे अधिक असर महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है। यहां स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। महाराष्ट्र में स्वाइन फ्लू के कारण इस साल 302 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 325 से ज्यादा लोग अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।
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पिछले दिनों एक सरकारी अधिकारी ने बताया था कि 14 अक्टूबर तक सामने आए 1,793 मामलों में से महाराष्ट्र में 217 मौत का आंकड़ा दर्ज किया गया। इसके बाद राजस्थान का नंबर है जहां इस समय के अंदर एच1एन1 के 1,912 मामलों में से 191 लोगों की मौत हुई। इसके बाद गुजरात में 1,478 मामलों में से 45 लोगों के मरने की खबर है।
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यह वायरस जनित बीमारी है, जो मुख्यत सूअर से मनुष्य में फैलती है। इसे एच1एन1 के नाम से जानते हैं। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो इसके वायरस आसपास के व्यक्ति को चपेट में ले लेते हैं। मरीज के इस्तेमाल की वस्तुएं छूने से भी संक्रमण की आशंका होती है।
हल्का फ्लू या स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड और कभी-कभी दस्त और उल्टी के साथ आता है। हल्के मामलों में, सांस लेने में परेशानी नहीं होती है। लगातार बढ़ने वाले स्वाइन फ्लू में छाती में दर्द के साथ उपरोक्त लक्षण, श्वसन दर में वृद्धि, रक्त में ऑक्सीजन की कमी, कम रक्तचाप, बदलती मानसिक स्थिति, गंभीर निर्जलीकरण और अंतर्निहित अस्थमा, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, दिल की विफलता, एंजाइना या सीओपीडी हो सकता है।
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