
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी (एपी) के प्रमुख अजित दादा पवार के विमान हादसे में साजिश की गुत्थी अब तक सुलझी नहीं है कि अब उनके मंत्रालय में उनके फर्जी हस्ताक्षर से 75 फाइलों को मंजूरी देने का मामला भी उजागर हो गया है। इस वजह से अब उनका पूरा मंत्रालय संदेह के घेरे में आ गया है। सवाल उठ रहे हैं कि उनके निधन के बाद किन-किन महत्वपूर्ण फाइलों के साथ छेड़छाड़ किए गए हैं। फिलहाल विपक्ष के विरोध के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन 75 फाइलों पर रोक लगा दी है जिसे अजित दादा के निधन के बाद मंजूरी दी गई है। ये 75 फाइलें अल्पसंख्यक विकास विभाग की हैं और इस विभाग का मंत्रालय अजित दादा के पास था।
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28 जनवरी की सुबह में 8 बजकर 46 मिनट पर बारामती में विमान हादसे में अजित पवार सहित 5 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने तीन दिनों का राजकीय शोक जाहिर किया था। लेकिन अजित दादा के मंत्रालय के अल्पसंख्यक विकास विभाग ने 20 संस्थाओं के 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा का प्रमाणपत्र जारी कर दिया। मजेदार बात यह है कि इन फाइलों पर अजित दादा के निधन के बाद उनके डिजिटल हस्ताक्षर किए गए।
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तत्कालीन विभागीय मंत्री माणिकराव कोकाटे ने 12 अक्तूबर 2025 को अल्पसंख्यक दर्जा का प्रमाणपत्र बांटने पर रोक लगा दी थी। कोकाटे के मंत्री पद छोड़ने के बाद यह विभाग अजित दादा के पास था। लेकिन मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत करके चार दिनों में अजित दादा के फर्जी हस्ताक्षर के साथ फाइलों को मंजूरी दे दी।
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अजित पवार के भतीजे और शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने ही विमान हादसे में साजिश का आरोप लगाया है। इसके साथ ही विमान हादसे से एक दिन पहले अजित दादा पर एक फाइल पर हस्ताक्षर करने के लिए पूर्व विदर्भ के एक बड़े नेता के दबाव बनाने का भी आरोप लगाया था। अब मंत्रालय में अजित दादा के फर्जी हस्ताक्षर से अल्पसंख्यक विभाग की फाइलों को मंजूरी दिए जाने के बाद रोहित ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सब कुछ अर्थहीन हो गया है, क्या मनुष्य का कोई मूल्य रह गया है? क्या उसमें थोड़ी सी भी भावना और संवेदनशीलता होनी चाहिए या नहीं?
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सवाल खड़ा किया है कि राजकीय अवकाश के दिन आखिरकार किसके इशारे पर इतना बड़ा घोटाला किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री फडणवीस इसके जवाबदेह हैं। इस घटना की जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। अजित दादा के मंत्रालय में हुए इस घोटाले पर राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने अल्पसंख्यक दर्जा देने की प्रक्रिया को पैसे कमाने का धंधा बनाने का आरोप लगाते हुए राज्य के 8500 स्कूलों की जांच कराने की मांग की है।
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