
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने व्यवसायी सुभाष चंद्रा के मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा 22 हजार करोड़ रुपये के दावे को महज 6.5 करोड़ रुपये में सेटल करने पर तंज कसते हुए कहा कि एनएसीएलटी का मतलब ‘‘नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल’’ है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि एनसीएलटी का मतलब ‘‘नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘किसान 50 हजार न चुकाए तो जमीन नीलाम हो जाती है। वेतनभोगी वर्ग एक किश्त न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता। मगर, चुनिंदा "मित्रों" के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है- कितना भी निकालो, जो मर्ज़ी चुकाओ।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं, एक चंद अरबपतियों के लिए, दूसरी बाक़ी सबके लिए है।
इससे पहले, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वित्तीय शब्दावली में जब लेनदारों को बकाया रकम का केवल एक हिस्सा मिलता है तो अंतर को प्रतिशत के रूप में ‘हेयरकट’ कहा जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने अभी एक जाने-माने कारोबारी की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत लेनदारों को करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये मिलेंगे।’’ कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘यह सिर्फ हेयरकट नहीं है। यह वास्तव में मुंडन है और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 का पूरा मजाक बनाता है।’’
दूसरी तरफ, मामले के तूल पकड़ने पर सुभाष चंद्रा ने एक बयान में कहा कि व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में उनके खिलाफ कुल दावा केवल 3,992 करोड़ रुपये का है और इस राशि के लिए वह उधारकर्ता नहीं, केवल व्यक्तिगत गारंटर थे। उन्होंने कहा कि किसी भी ऋणदाता से कोई पैसा उधार नहीं लिया है।
वहीं एचडीएफसी बैंक ने कहा कि वह मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा से जुड़े मामले में एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी में अपील करने पर विचार कर रहा है। निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक ने बयान में कहा कि एनसीएलटी के आदेश के तहत उसके कुल 680 करोड़ रुपये के दावे में से केवल 3.2 प्रतिशत राशि ही स्वीकार की गई है।
एचडीएफसी बैंक ने कहा, “बैंक ने इस कर्ज समाधान योजना का विरोध किया था और इसके खिलाफ मतदान किया था, लेकिन इसे बहुमत से मंजूरी दे दी गई। बैंक राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अपील दायर करने पर विचार कर रहा है।” एचडीएफसी बैंक ने कहा कि बैंक के विलय से पहले उसने यह ऋण सुविधा अपनी मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड से हासिल की थी।
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यह प्रतिक्रिया एनसीएलटी के उस आदेश के एक दिन बाद आई है, जिसमें मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृत कर्ज दावों के निपटान के लिए सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान करने वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी गई थी। इससे कर्जदाताओं को अपनी बकाया राशि के करीब 99.97 प्रतिशत हिस्से का नुकसान यानी ‘हेयरकट’ उठाना पड़ेगा।
यह मामला विवेक इन्फ्राकॉन द्वारा लिए गए 170 करोड़ रुपये के ऋण के भुगतान में चूक से जुड़ा है। यह ऋण तत्कालीन इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने दिया था जो कि बाद में फंस गया। चंद्रा ने इस ऋण की व्यक्तिगत गारंटी दी थी। ऋणदाता के एनसीएलटी जाने के बाद चंद्रा के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू हुई और अन्य कर्जदाताओं के दावों को मिलाकर कुल दावे 22,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गए।
एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने तीसरे सदस्य के रूप में मंगलवार को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 114 के तहत कर्ज समाधान योजना को मंजूरी दी थी। इससे पहले न्यायाधिकरण की दो सदस्यीय पीठ ने अलग-अलग राय दी थी, जिसके बाद अध्यक्ष ने शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था।
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