
दिल्ली में कोरोना वायरस के नए सब वेरिएंट जेएन.1 का एक रोगी पाया गया है। इसके चलते अब दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। एलएनजेपी अस्पताल में मरीजों के लिए 20 बेड आरक्षित किए गए हैं। कोरोना के मरीजों के लिए अस्पताल में अलग हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है।
कोरोना की जांच हेतु अस्पताल में अलग जांच केंद्र बनाया गया है। अस्पताल में कोरोना के मरीजों के लिए एक अलग ही वार्ड तैयार किया गया है, जिसमें कोरोना के मरीजों के लिए लगभग 20 बेड की व्यवस्था की गई है और कोरोना बीमारी में मरीजों को होने वाली समस्याओं से निपटने की सभी व्यवस्थाएं भी उस वार्ड में मौजूद है।
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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने आज अस्पताल में तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों के लिए विशेष आईसीयू बनाया गया है। सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। अस्पताल में प्रवेश करते ही मरीजों के लिए कोरोना हेल्प डेस्क बनाई गई है। फिलहाल विभिन्न अस्पतालों में केवल 4 कोरोना मरीजों को भर्ती कराया गया है।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि एलएनजेपी अस्पताल में अभी पूरा वार्ड खाली पड़ा हुआ है, क्योंकि अस्पताल में अभी तक एक भी कोरोना मरीज के होने की पुष्टि नहीं हुई है। परंतु लगातार अस्पताल में कोरोना के लक्षणों से संबंधित मरीजों की जांच की जा रही है, जैसे ही कोई भी कोरोना संबंधित मरीज की पुष्टि होती है, उसको तुरंत अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया जाएगा।
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कोरोना जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए अलग से हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है, ताकि कोरोना के मरीजों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े और साथ ही साथ अस्पताल में आने वाले अन्य मरीजों को भी किसी प्रकार का खतरा न हो। क्योंकि यदि एक ही जगह पर सभी मरीजों की जांच की जाएगी तो उस स्थिति में एक मरीज से दूसरे मरीज को कोरोना होने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।
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इन सभी परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए कोरोना के मरीजों के लिए अलग से हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है। अस्पताल का कहना है कि जैसे ही कोई भी कोरोना या फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीज की पुष्टि होगी, तुरंत उसका आरटीपीसीआर टेस्ट किया जाएगा और इस आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए अस्पताल में अलग से एक जांच केंद्र की व्यवस्था की गई है। यहां अलग से जांच केंद्र भी बनाया गया है, ताकि कोरोना से पीड़ित मरीजों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े और जल्द से जल्द इस बीमारी की पुष्टि हो सके ताकि यदि किसी मरीज को कोरोना पॉजिटिव आता है तो तुरंत प्रभाव से उसे इलाज मुहैया कराया जा सके।
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अलग जांच केंद्र बनाने से कोरोना के फैलने के खतरे को भी कम किया जा सकता है। इसी सोच और सतर्कता के साथ अस्पताल प्रशासन ने कोरोना जैसे लक्षणों वाले मरीज के लिए अलग जांच केंद्र की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली में अभी तक जेएन 1 के केवल एक ही मरीज की पुष्टि हुई थी। वह मरीज पुष्टि होने के पश्चात नजदीकी किसी अस्पताल में भर्ती हुआ था। अब वह मरीज भी स्वस्थ हो चुका है और अपने घर लौट चुका है। हालांकि यह वेरिएंट पहले वाले वेरिएंट से कम खतरनाक प्रकृति का है, परंतु हमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी है I
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