
वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर सियासत तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच 'एक्स' पर तीखी जुबानी जंग देखने को मिली। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने बीजेपी के एक पोस्ट को शेयर करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
दरअसल, इससे पहले बीजेपी ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट किया था, "एसआईआर ने वोटर लिस्ट से 2.8 करोड़ मृत मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। सवाल सीधा है कि वोटर लिस्ट में इन नामों को बनाए रखने से किसे फायदा हुआ? कौन ऐसे नाम चाहता है जिनका इस्तेमाल फर्जी वोटिंग के लिए किया जा सके? अब जब एसआईआर वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बना रहे हैं, तो इंडी अलायंस हंगामा कर रहा है। क्यों? क्या इंडी अलायंस चाहता है कि मृत लोगों के नाम वोटर लिस्ट में बने रहें? देश को इसका जवाब मिलना चाहिए।"
बीजेपी के इस पोस्ट का जवाब देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आंकड़ों को लेकर पलटवार किया। उन्होंने लिखा, "एसआईआर के तहत 13 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए हैं। बीजेपी का कहना है कि इनमें से 2.8 करोड़ वोटर ऐसे थे जिनकी मौत हो चुकी थी, ठीक है। बाकी बचे 10.2 करोड़ वोटरों का क्या?"
पवन खेड़ा ने आगे सवाल उठाया कि अगर इतनी बड़ी संख्या में मृत लोगों के नाम वोटर लिस्ट में मौजूद थे, तो फिर हर साल होने वाली समरी रिवीजन प्रक्रिया का क्या औचित्य रहा। उन्होंने लिखा, "अगर 2.8 करोड़ मरे हुए लोगों के नाम वोटर लिस्ट में थे, तो क्या 2014 से हर साल होने वाला 'समरी रिवीजन' (वोटर लिस्ट का सालाना अपडेट) सच में इतना खराब था? क्या बीजेपी यह मान रही है कि वह सालों से वोटर लिस्ट को ठीक से बनाए रखने में नाकाम रही है?"
कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर के नाम पर बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं, जिससे लोकतंत्र पर असर पड़ेगा। वहीं, बीजेपी का कहना है कि यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और फर्जी वोटिंग से मुक्त बनाने के लिए जरूरी है। भाजपा का आरोप है कि 'इंडी' गठबंधन मृत वोटरों के नामों को बचाना चाहता है ताकि उसका राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।
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