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'पीएम के टॉफी बांटने...', जयराम रमेश ने आर्थिक नीतियों को लेकर मोदी सरकार को घेरा, बोले- इनके पास कोई नया विचार नहीं

जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर माहौल इतना नकारात्मक हो गया है कि अब मोदी सरकार के पेशेवर "चीयरलीडर्स" भी सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएं जताने लगे हैं।

जयराम रमेश ने आर्थिक नीतियों को लेकर मोदी सरकार को घेरा, बोले- इनके पास कोई नया विचार नहीं
जयराम रमेश ने आर्थिक नीतियों को लेकर मोदी सरकार को घेरा, बोले- इनके पास कोई नया विचार नहीं फोटोः सोशल मीडिया

कांग्रेस ने देश की आर्थिक नीतियों के लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा कि आर्थिक नीतियों में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार के पास आत्मप्रशंसा के अलावा कोई नया विचार नहीं बचा है।

जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर माहौल इतना नकारात्मक हो गया है कि अब मोदी सरकार के पेशेवर "चीयरलीडर्स" भी सार्वजनिक रूप से अपनी चिंताएं जताने लगे हैं।

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रमेश ने अपने लिखित बयान में कहा, "महंगाई के अनुमान तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि विकास दर के अनुमान उल्लेखनीय रूप से घट रहे हैं। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लगातार सिकुड़ रहा है और आपूर्ति श्रृंखला का प्रबंधन इतनी बुरी तरह किया गया है कि प्रधानमंत्री अब खुद उपभोक्ताओं से अपनी खपत कम करने की अपील कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि इन चिंताओं में कुछ भी नया नहीं है और कांग्रेस काफी समय से इन्हें उठाती रही है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण चिंता सुस्त निवेश माहौल को लेकर रही है।

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रमेश के अनुसार, निजी निवेश की दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बिना आर्थिक विकास को तेज गति नहीं दी जा सकती और न ही उसे लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखा जा सकता है, जबकि इसकी आवश्यकता स्पष्ट रूप से है।

उन्होंने कहा, "निजी निवेश की यह दर आगे नहीं बढ़ पाई है क्योंकि वास्तविक मजदूरी में ठहराव बना हुआ है, जिससे सभी आय वर्गों में खपत की वृद्धि दब गई है तथा उपभोक्ता मांग के अभाव में भारतीय उद्योग जगत के पास निवेश करने का कोई विकल्प नहीं है।’’

उनके मुताबिक , इस स्थिति की एक वजह यह भी है कि नीतियों में बार-बार बदलाव, प्रशासनिक आदेशों, कर संबंधी नोटिसों, छापों और कर अधिकारियों व जांच एजेंसियों द्वारा छापेमारी की धमकियों के कारण निवेश समुदाय में भय और कारोबारी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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रमेश ने दावा किया कि सरकार की मदद से प्रधानमंत्री के सबसे करीबी मित्रों द्वारा किए जा रहे अधिग्रहणों ने स्वामित्व के बढ़ते केंद्रीकरण को बढ़ावा दिया है ‘‘और इस क्रोनीइज़्म का सबसे चमकदार उदाहरण मोदानी है।’’

उन्होंने कहा, "कॉरपोरेट जगत के पास स्वतंत्र रूप से निवेश करने और उससे जुड़े जोखिम उठाने का बहुत कम अवसर बचा है, क्योंकि मुनाफा मोदी सरकार के ‘चंदा लो, धंधा दो’ काउंटर पर भुगतान करके भी आसानी से कमाया जा सकता है।"

उनका कहना है कि बड़ी-बड़ी निवेश घोषणाएं लगातार की जा रही हैं, लेकिन इनमें से कितनी घोषणाएं जमीन पर वास्तविकता में बदलती हैं, यह गंभीर सवाल है।

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कांग्रेस नेता ने कटाक्ष किया, "प्रधानमंत्री टॉफियां बांटने और जनता से नैतिक अपील करने में व्यस्त हैं। देश के पैरों तले जमीन खिसक रही है।"

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, "हमें आर्थिक नीतियों में एक आमूलचूल बदलाव की जरूरत है, लेकिन मोदी सरकार के पास आत्मप्रशंसा के अलावा कोई नया विचार नहीं बचा है। ज्ञानेश (कुमार) के जरिए वह चुनाव तो मैनेज कर रहे हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था को लेकर उन्हें तुरंत नए ज्ञान की जरूरत है।"

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पीटीआई के इनपुट के साथ

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