
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर जो वक्तव्य दिया, उसमें ईरान पर जारी हमलों की निंदा भी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पीएम का काफी देर से आया बयान ‘आत्म-प्रशंसा, कायरता और डॉयलागबाजी’ से भरा हुआ था। रमेश ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कोविड काल के समय का उल्लेख करना चिंताजनक है क्योंकि उस वक्त सरकार की प्रतिक्रिया विनाशकारी थी।
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जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज लोकसभा में प्रधानमंत्री का अस्वाभाविक रूप से छोटा भाषण, हमेशा की तरह आत्मप्रशंसा, कायरता और ‘डॉयलागबाजी’ वाला था। ईरान पर जारी अमेरिकी-इजराइल हवाई हमलों की निंदा में एक भी शब्द नहीं कहा गया।’’ उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का हमला निश्चित रूप से पूरी तरह से अस्वीकार्य है, लेकिन शासन परिवर्तन और राज्य के पतन के उद्देश्य से ईरान पर लगातार बमबारी भी अस्वीकार्य है।
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कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने भारत के आर्थिक विकास रिकॉर्ड पर भी अपना बड़बोलापन जारी रखा। कुछ दिन पहले, उनके अपने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने चेतावनी दी थी कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री का मानना है कि अगर वह इस बेहद विश्वसनीय और परेशान करने वाली रिपोर्ट से खुद को नहीं जोड़ते हैं तो इससे बच सकते हैं।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘अंततः प्रधानमंत्री का कोविड-19 महामारी का आह्वान चिंताजनक है। उनकी सरकार की प्रतिक्रिया विशिष्ट रूप से विनाशकारी थी। राष्ट्र उन अत्यधिक निराशाजनक दृश्यों को नहीं भूल सकता जो तब बहुत सामान्य हो गए थे, लाखों प्रवासी नंगे पैर अपने घरों की ओर चल रहे थे, हजारों लोग ऑक्सीजन की कमी से मर रहे थे और लाखों लोग बेरोजगार हो गए थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम केवल यह आशा कर सकते हैं कि इस बार अधिक तैयारी होगी।’’
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प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को अपने भाषण में कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए अप्रत्याशित संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है जिससे निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है और देशवासियों को उसी तरह तैयार रहना होगा जिस तरह एकजुटता के साथ सबने कोरोना वायरस महामारी का सामना किया था।
पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर लोकसभा में वक्तव्य देते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है और भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
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