
कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के सदन में उपस्थित होकर सांसदों के सवालों का सामना नहीं करने के कारण संसद का कामकाज लगातार प्रभावित हो रहा है और ऐसे अब वर्तमान मानसून सत्र के चार कार्यदिवस बचे हैं तो उन्हें प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्यवाही को लेकर जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि संसद का कामकाज लगातार 15 दिनों से सामान्य रूप से नहीं चल पाया तो एकमात्र वजह गृह मंत्री का दोनों सदनों में आकर पुलिस कार्रवाई पर बयान देने से इनकार करना है।
उन्होंने यह आरोप लगाया कि इस मानसून सत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री की "कायरता" का पर्दाफाश हो गया है।
रमेश ने दावा किया कि अमित शाह संसद परिसर में अपने कक्ष में आते हैं और घंटों बैठे रहते हैं, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा में आकर सांसदों का सामना करने तथा दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवालों के जवाब देने से बच रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय गृह मंत्री को सबसे पहले पुलिस की ज्यादतियों पर जवाब देना चाहिए।’’
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्री के प्रभार और नियंत्रण में है और ऐसे में उन्हें सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने शाह के सदन से लगातार अनुपस्थित रहने को ‘‘अभूतपूर्व’’ करार दिया। रमेश ने कहा कि गृह मंत्री को पुलिस कार्रवाई पर अपना पक्ष रखना चाहिए।
कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े ‘‘चढ़ावा चोरी’’ और ‘‘आस्था के साथ धोखे’’ के आरोपों पर जवाब देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं पांच फरवरी 2020 को लोकसभा में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी।
रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए उसी ट्रस्ट ने ‘‘सभी भारतीयों के भरोसे और आस्था के साथ विश्वासघात किया है’’ और प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप नहीं रह सकते।
उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जोड़ी ‘‘बड़ी-बड़ी बातें करने और खोखली डींगें हांकने में माहिर’’ है, लेकिन उनकी ‘‘कायरता’’ का अब पूरी तरह पर्दाफाश हो गया है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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