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जुलाई के आंदोलन से सबक लेकर आए प्रदर्शनकारी, मास्क-चश्मे और पोस्टरों के साथ पहुंचे

शनिवार 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बैरिकेड और भारी सुरक्षा तैनाती के कारण ज्यादातर प्रदर्शनकारी आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच सके। लेकिन जिसको जहां मौका मिला उसने वहीं अपनी आवाज उठाई। अलग-अलग स्थानों पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

फोट - पीटीआई
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 डिजिटल पोस्टर, राजनीतिक कलाकृतियों और अपनी सुरक्षा के उपायों के साथ जुलाई के प्रदर्शन में शामिल हुए कई लोग शनिवार को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नए आंदोलन में हिस्सा लेने वालों का समर्थन करने पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि वे भारी सुरक्षा व्यवस्था और बड़े पैमाने पर हिरासत के बीच आयोजित हो रहे प्रदर्शन में शामिल हो सकेंगे।

कुछ लोगों ने घर पर पोस्टर बनाए, जबकि अन्य ने हिरासत और पुलिसकर्मियों के वर्दी पर नामपट्टियां नहीं लगाने जैसे मुद्दों पर केंद्रित डिजिटल कलाकृतियां तैयार कीं। उन्होंने पुलिस की संभावित लाठीचार्ज जैसी स्थितियों से निपटने की भी तैयारी की।

पहले के प्रदर्शन में शामिल रहे लोगों ने पहली बार आने वाले प्रदर्शनकारियों को कम से कम दो मास्क, तैराकी के चश्मे, रेनकोट और ऐसे कपड़े साथ रखने की सलाह दी, जिनके भीगने से उन्हें परेशानी न हो। उन्होंने पोस्टरों के जरिए पुलिस कार्रवाई की आशंका को ध्यान में रखते हुए ये सुझाव दिए।

फोटो - पीटीआई

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘हमने जुलाई के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, इसलिए इस बार हम चाहते थे कि आंदोलन में शामिल होने वाले लोग बेहतर तैयारी के साथ आएं। हममें से कई लोग प्रदर्शनकारियों के लिए घर पर राजनीतिक कलाकृतियां और पोस्टर भी बना रहे हैं।’’

पहले के प्रदर्शनों में शामिल रहे हार्दिक ने कहा कि उन्होंने शनिवार के प्रदर्शन से पहले कथित अवैध हिरासत और पुलिसकर्मियों द्वारा नामपट्टियां नहीं पहनने जैसे मुद्दों पर डिजिटल राजनीतिक कलाकृतियां तैयार की थीं। उन्होंने लाठीचार्ज जैसी संभावित स्थितियों के लिए भी तैयारी की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पूर्वजों ने शोषणकारी शासन के खिलाफ लड़ते हुए आंसू बहाए थे। आज हम एक बार फिर फासीवाद की अंधेरी गलियों में अहिंसा की मशाल लेकर चल रहे हैं।’’

हार्दिक ने कहा, ‘‘मेरी ज्यादातर दोस्त महिलाएं हैं और आज जिस तरह वह खुद असुरक्षित महसूस करती है, उसे देखते हुए मैं उनके लिए भी लड़ूंगा। मुझे यकीन है कि यह प्रदर्शन कुछ समय तक जारी रहेगा। मैंने लोगों को कम से कम दो मास्क, तैराकी के चश्मे, रेनकोट और ऐसे कपड़े रखने की सलाह देने वाले पोस्टर बनाए हैं, जिनके भीगने से उन्हें परेशानी न हो। ऐसा मैंने पुलिस कार्रवाई की आशंका को ध्यान में रखकर किया है।’’

हार्दिक ने जुलाई में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन और 20 जुलाई को संसद तक निकाले गए मार्च में भी हिस्सा लिया था।

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सीजेपी द्वारा नीट में अनियमितताओं को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर 20 जुलाई को निकाले गए मार्च में राजनीतिक नेताओं, अभिनेताओं और आम लोगों ने हिस्सा लिया था। उस दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। यह आंदोलन एक महीने से अधिक समय तक चला था और प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए थे।

इस बार सीजेपी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर प्रदर्शन का आह्वान किया था।

हालांकि, शनिवार को जंतर-मंतर पर बैरिकेड और भारी सुरक्षा तैनाती के कारण प्रदर्शनकारी आयोजन स्थल तक नहीं पहुंच सके। अलग-अलग स्थानों पर कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

राष्ट्रीय राजधानी में करीब 25,000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए थे, जबकि मेट्रो के 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी प्रतिबंध लगाए गए थे। कई पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया। कुछ पत्रकारों ने आरोप लगाया कि प्रेस पहचान पत्र दिखाने के बावजूद उन्हें हिरासत में लिया गया।

जुलाई के प्रदर्शन के बाद लौटे लोगों के लिए इस बार एक-दूसरे तक पहुंचना भी मुश्किल साबित हुआ, क्योंकि ज्यादातर सूचनाएं सोशल मीडिया के जरिए मिल रही थीं।

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘पिछली बार हम जंतर-मंतर पर मौजूद थे और उसके बाद हमें मार्च निकालना पड़ा था। इस बार इस बात को लेकर बहुत भ्रम है कि कहां और कब पहुंचना है। हमें केवल ट्वीट और पोस्ट के जरिए जानकारी मिल रही है। हम कैसे तय करें कि कब और कहां पहुंचना है? अगर हममें से कुछ लोग एक साथ भी इकट्ठा होते हैं, तो उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जा सकता है। लेकिन हम यह लड़ाई जारी रखेंगे। हम अपने लोकतंत्र के लिए लड़ेंगे।’’

एक अन्य प्रदर्शनकारी प्रवीण ने कहा कि यदि वे एक जगह इकट्ठा नहीं हो सकते, तब भी अपनी आवाज उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पोस्टर, कलाकृतियां और हमारी मौजूदगी यह दिखाने का तरीका हैं कि हम किन मुद्दों के लिए खड़े हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस बार हम चश्मे, मास्क और ढीले कपड़ों के साथ तैयारी करके आए हैं। पिछली बार से हमने सबक सीखा है।’’

विभिन्न स्थानों पर तिरंगे और पोस्टर दिखाई दिए, जिन पर ‘‘ज्ञानू, खेल खत्म!’’, ‘‘नागरिकता पर हमला बंद करो’’ और ‘‘मेरी बिल्ली भी इस सरकार से ज्यादा जवाबदेह है’’ जैसे नारे लिखे थे। ये संदेश प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर पहुंचने से काफी पहले तैयार किए थे।

हालांकि जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों के लिए काफी हद तक पहुंच से बाहर रहा, लेकिन लौटकर आए प्रतिभागियों के पोस्टर, कलाकृतियों और सलाह से यह पता चला कि पहले के आंदोलन ने अगली बार की तैयारियों को किस तरह प्रभावित किया। पहले प्रदर्शन में शामिल रहे लोग यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे थे कि नए प्रतिभागियों को इस बार अनिश्चितता का सामना अकेले न करना पड़े।

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