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पंजाब 360° : अकाल तख्त पर मुख्यमंत्री की पेशी और मजहबी मेले में चुनावी वादे

एक नई बहस शुरू हो गई कि क्या हर वह सिख जो अमृतधारी नहीं है, पतित सिख कहा जा सकता है? दूसरी तरफ एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने चिट्ठी लिखकर कहा कि यह पेशी सिख धर्म की मर्यादा का उल्लंघन है, क्योंकि अकाल तख्त अमृतधारी सिख को ही तलब कर सकता है।

Getty Images
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पंजाब के राजनीतिक रंगमंच पर साल के पहले हफ्ते से ही सबसे गर्म मुद्दा था मुख्यमंत्री भगवंत मान की अकाल तख्त के सामने पेशी। मान से जुड़े कई विवादों के चलते अकाल तख्त ने उन्हें तलब किया था। ज्यादातर आरोपों के पीछे मान का बड़बोलापन था। अकाल तख्त का मानना था कि इन बयानों में उन्होंने सिख धर्म की मर्यादा का उल्लंघन किया है। उनके उस अपमानजनक वीडियो को लेकर भी अकाल तख्त सफाई चाहता था जिसे मान और उनकी पार्टी फेक बता रहे थे। 

यह मान और उनकी पार्टी के सामने नई तरह की चुनौती थी। शुरुआत में ऐसा लगा कि वह समझ ही नहीं पा रहे कि इसका मुकाबला कैसे किया जाए। पार्टी के एक प्रवक्ता ने तो यह तक कह दिया कि अकाली दल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को एक राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। 

खुद मान ने भी शर्त रखी कि उनकी पेशी का लाइव प्रसारण किया जाए। इसे रियलिटी शो बनाने की यह शर्त अकाल तख्त ने नहीं मानी। फिर हालात की नजाकत को देखते हुए पार्टी के बागी सुर भी ठंडे पड़ गए और मान का यह बयान आया कि वह नंगे पांव अकाल तख्त जाएंगे। 

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पंजाब के लिए यह कोई नई बात नहीं है। अतीत में पंजाब के चार मुख्यमंत्रियों और यहां तक कि राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को भी अकाल तख्त तलब कर चुका है। इस बार फर्क यह था कि मुख्यमंत्री मान को पहले की तरह तख्त की फसील पर बुलाने के बजाय उन्हें अकाल तख्त के सचिवालय में पेश होने का हुक्म दिया गया। तर्क यह दिया गया कि मान अमृतधारी और पूर्ण सिख न होकर 'पतित' सिख हैं, इसलिए उन्हें अकाल तख्त की फसील पर नहीं बुलाया जा सकता।

इससे एक नई बहस शुरू हो गई कि क्या हर वह सिख जो अमृतधारी नहीं है, पतित सिख कहा जा सकता है? दूसरी तरफ एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कमेटी के वर्तमान अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी और अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज को चिट्ठी लिखकर कहा कि यह पेशी सिख धर्म की मर्यादा का उल्लंघन है, क्योंकि अकाल तख्त अमृतधारी सिख को ही तलब कर सकता है।

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बृहस्पतिवार को मान जब अकाल तख्त पहुंचे तो उनके साथ ही दो भरे हुए बैग भी थे। बताया गया कि इनमें वह अपनी बेगुनाही के सबूत साथ ले गए थे। बाद में जत्थेदार गरगज ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि मुख्यमंत्री पूरी विनम्रता से पेश आए और कई आरोपों पर उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की कि उन्हें इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए थे। 

मुख्यमंत्री की इस पेशी के साथ ही राजनीतिक चर्चा खत्म हो गई। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। मान की इस पेशी का पूरा ब्योरा अब पांच सिख साहिबान के सामने पेश किया जाएगा। वहां यह तय होगा कि उन्हें सजा दी जाए या बरी कर दिया जाए।

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धार्मिक मेले में चुनावी कवायद

मुक्तसर साहिब का मशहूर सालाना माघी मेला इस बार राजनीति का मंच बन गया। कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी दलों ने इस मौके पर अपने-अपने पंडाल सजाए और सम्मेलन किए। मुक्तसर की लड़ाई में शहीद हुए 40 मुक्तों की याद में मनाए जाने वाले इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन से जो खबरें सामने आईं, वे ज्यादातर राजनीतिक ही थीं। 

सबसे बड़ा आयोजन आम आदमी पार्टी ने किया। उसके आलीशान पंडाल और 1600 बसों के इंतजाम की चर्चा मीडिया में पहले ही शुरू हो गई थी। मुख्यमंत्री मान और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों के अलावा पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया भी मंच पर थे। मान ने एसजीपीसी के गुरु ग्रंथ साहिब के खोए हुए 328 स्वरूपों में से 169 का पता लगाने की बात कह कर मीडिया में सुर्खियां बटोरने का काम किया। 

आप ने 2016 के माघी मेले में भी इसी तरह का आयोजन किया था। तब वह पंजाब के लिए एक नई पार्टी थी और यह आयोजन उसका लांच पैड बना। अब 2027 के लिए भी यही उम्मीद बांध कर पार्टी मुक्तसर साहिब के मैदान में उतरी थी। 

सुखबीर बादल की अगुवाई वाला अकाली दल भी पीछे नहीं था। जब सुखबीर बादल बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने वादों की झड़ी ही लगा दी। एक तरह से उन्होंने अगले विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र ही पढ़ डाला।

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पहली बार ऐसे किसी मौके पर बीजेपी ने भी अपना अलग से मंच सजाया। मंच पर केन्द्रीय मंत्री अुनराग ठाकुर, रवनीत सिंह बिट्टू और पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ के अलावा केसरिया पगड़ी में सजे हरियाण के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद थे। सैनी पिछले कुछ समय से पंजाब के तकरीबन सभी धार्मिक आयोजनों में इसी वेशभूषा में मौजूद रहते हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि बीजेपी सैनी की मदद से पंजाब में पैर जमाने की कोशिश कर रही है। मंच से सिर्फ डबल इंजन के गुण ही गाए गए। लेकिन पार्टी उतनी भीड़ नहीं जुटा सकी जितनी वहां बाकी आयोजनों में थी। सिमरनजीत सिंह मान की पार्टी अकाली दल अमृतसर और एनएसए के तहत असम के डिब्रूगढ़ की जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी वारिस पंजाब दे ने भी अपनी अपनी सभाएं कीं।

सिर्फ कांग्रेस ही थी जिसने इस मौके पर कोई आयोजन नहीं किया। पार्टी ने अकाल तख्त के 2017 के एक हुक्मनामे का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि धार्मिक अवसरों पर राजनीतिक आयोजन नहीं किए जाने चाहिए। पार्टी के पंजाब अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने इस पर सिर्फ इतना कहा कि 'उनकी पार्टी धर्म और राजनीति को मिलाने में विश्वास नहीं करती।'

माघी मेले में हालांकि कांग्रेस अनुपस्थित थी, लेकिन आगे की राजनीति में पार्टी का दांव काफी बड़ा है। चुनाव में अभी एक साल है और तब तक सभी को पंजाब की जमीन पर ही मेहनत करनी होगी।

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