
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ बीते करीब एक महीने से चल रहे किसान आंदोलन का प्रतिकूल असर अब नजर आने लगा है। मंगलवार को पंजाब के सामने भीषण बिजली संकट का खतरा खड़ा हो गया है क्योंकि बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला कोयला अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। गौरतलब है कि किसान आंदोलने के चलते मालगाड़ियों की आवाजाही रेलवे ने बंद कर दी है, जिसके चलते कोयले की आपूर्ति रुकी हुई है। हालांकि किसानों काफी समय पहले ही मालगाड़ियों के लिए रेल पटरियां खोल चुके हैं।
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मंगलवार को दिन में पंजाब में 1000 से 1500 मेगावाट तक बिजली कमी महसूस की गई। राज्य का आखिरी बिजली प्लांट, जीवीके थर्मल के पास भी बिजली उत्पादन के लिए कोयला खत्म हो गया। इसके चलते बिजली विभाग को मजबूरन रिहायशी, कमर्शियल और खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली में मंगलवार शाम से ही कटौती करनी पड़ रही है।
पंजाब सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि फिलहाल दिन में पंजाब में बिजली की मांग 5100 से 5200 मेगावाट तक है और रात में यह घटकर करीब 3400 मेगावाट रह जाती है। दूसरी तरफ बिजली की आपूर्ति नाकाफी है। सिर्फ खेती के लिए ही 4-5 घंटे तक करीब 800 मेगावाट बिजली दी जा रही है।
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ऐसे हालात में पंजाब बिजली कारपोरेशन के पास कोई रास्ता नहीं बचा है क्योंकि बिजली उत्पादन हो नहीं रहा है और अन्य जगह से बिजली खरीदना काफी महंगा है। इसके चलते बिजली बचाने के लिए बिजली कटौती का रास्ता अपनाया जा रहा है। स्थिति यह है कि पूरे राज्य में 4 से 5 घंटे बिजली कटौती की जा रही है। मंगलवार को जीवीके थर्मल जो कि करीब 600 मेगावाट बिजली बनाता है वह भी शाम 5 बजे बंद हो गया। जिसके बाद हालात काफी गंभीर हो गए हैं। रोपड़ और लेहरा के बिजली संयत्र पहले ही उत्पादन बंद कर चुके हैं। फिर भी इन दोनों संयत्रों की एक एक इकाई को चालू करने की कोशिश की जा रही है ताकि जीवीके थर्मल के बंद होने से पैदा कमी को पूरा किया जा सके।
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