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पंजाब: मांगें नहीं मानीं तो मान सरकार के खिलाफ उतरेंगे रोडवेज कर्मचारी, दी बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी

कर्मचारी संगरूर जेल में बंद अपने 10 साथियों की रिहाई और आउटसोर्स कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

पंजाब रोडवेज के कर्मचारियों ने पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने कहा कि अगर इस सरकार को बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं तो इस निकम्मी सरकार को गिराने के लिए भी प्रचार करेंगे। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री मान को चेताया है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुई तो रोडवेज के कर्मचारी अपना प्रदर्शन और तेज करेंगे।

रोडवेज कर्मचारियों का प्रदर्शन ऐसे वक्त में हो रहा है जब प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और विपक्ष कई मुद्दों पर मान सरकार पर हमलावर है। इसी बीच, बुधवार को पंजाब रोडवेज के कर्मचारियों ने अमृतसर के सेंट्रल बस स्टैंड पर जोरदार प्रदर्शन किया।

कर्मचारी संगरूर जेल में बंद अपने 10 साथियों की रिहाई और आउटसोर्स कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। पंजाब के हर जिले में एक साथ चल रहे इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।

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कैशियर बलजीत सिंह ने बताया कि हम अपने उन 10 साथियों की रिहाई के लिए विरोध कर रहे हैं जो संगरूर जेल में बंद हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सत्ता में आने से पहले जो वादा किया था साढ़े चार साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं हुआ। सरकार ने आउट-ऑफ-सोर्स कर्मचारियों को 10 साल बाद नियमित करने का भी आश्वासन दिया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। कर्मचारियों ने 18 तारीख को परिवहन मंत्री हरपाल चीमा के साथ बैठक की थी। उन्होंने कहा कि अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुई तो तीन दिवसीय हड़ताल भी की जाएगी।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो वे सख्त कदम उठाएंगे। 25 जुलाई को बसों को डिपो में खड़ा कर दिया जाएगा। 26 जुलाई को मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन होगा। इसके बाद भी अगर मांगें पूरी नहीं होती है तो हमारी बसों में 5 से 6 लाख यात्री सफर करते हैं, हम वर्तमान सरकार के खिलाफ प्रचार करेंगे। मान सरकार ने हमसे किए गए वादों को पूरा नहीं किया है।

रोडवेज कर्मचारी सुभाष वैद्य ने कहा कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, हम लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हमारी कोई मांग पूरी नहीं की गई। अगर सरकार हमारी बात नहीं सुनती तो हम 5-6 लाख यात्रियों के सामने सरकार का चेहरा सामने लाएंगे।

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