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राम मंदिर दान चोरीः मनोज झा ने एसआईटी की कार्यशैली पर उठाए सवाल, बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश बताया

मनोज झा ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले और राम मंदिर के उद्घाटन के बाद कई महीनों तक 'जो राम को लाए हैं' गाना चला था। अब 'जो राम का चंदा खाए हैं', इस पर जवाब देना होगा। मनोज झा ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी उचित नहीं लगती है।

राम मंदिर दान चोरीः मनोज झा ने एसआईटी की कार्यशैली पर उठाए सवाल, बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश बताया
राम मंदिर दान चोरीः मनोज झा ने एसआईटी की कार्यशैली पर उठाए सवाल, बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश बताया फोटोः IANS

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने राम मंदिर दान चोरी प्रकरण में एसआईटी की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश की जाएगी और छोटी मछलियों को पकड़ा जाएगा। सांसद मनोज झा ने कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल की राम मंदिर दान प्रकरण की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग का समर्थन किया।

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केसी वेणुगोपाल की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को लिखे गए पत्र पर मनोज झा ने कहा, "मैं उनकी (केसी वेणुगोपाल) बात से सहमत हूं। एसआईटी की जो कार्यशैली मैंने बीते कुछ दिनों में देखी है, तो वो स्पष्ट तौर पर प्रतीत होता है कि बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश की जाएगी और छोटी मछलियों को पकड़ा जाएगा।"

उन्होंने आगे कहा, "2024 के चुनाव से पहले और राम मंदिर के उद्घाटन के बाद कई महीनों तक 'जो राम को लाए हैं' गाना चला था। अब 'जो राम का चंदा खाए हैं', इस पर जवाब देना होगा।" मनोज झा ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री की चुप्पी उचित नहीं लगती है।

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इस दौरान, मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से बडगाम में बूथ लेवल अधिकारियों से की गई मुलाकात पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मैं उनसे (मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार) बिल्कुल सहमत हूं, लेकिन आधा ही। नींव तो सचमुच मजबूत थी। सुकुमार सेन नींव रखकर गए थे, लेकिन अब जो इमारत ये पिछले दो-तीन चुनाव आयुक्तों ने खड़ी कर दी है, वो बहुत कमजोर कर दी। जब इमारत कमजोर होती है तो धीरे-धीरे नींव पर भी उसका असर पड़ता है। इस बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त को भी पता होना चाहिए।"

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वहीं, मनोज झा ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं हैं। आरजेडी सांसद ने कहा, "उन्होंने पार्टीशन लिटरेचर नहीं पढ़ा है। विभाजन के बारे में कई लोगों ने लिखा है। असल में स्थिति यह है कि नागपुर संघ मुख्यालय में रखा गया लिटरेचर एकांगी है। उस दृष्टिकोण को त्यागकर अगर वे व्यापक पार्टीशन लिटरेचर को पढ़ें तो शायद एक सांस्कृतिक संगठन के रूप में उनकी भूमिका बेहतर होगी।"

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