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'पीएम2.5 के सुरक्षित मानकों में बदलाव जरूरी, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में हो सुधार', कांग्रेस की सरकार से मांग

कांग्रेस ने देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में तत्काल सुधार की मांग की है। जयराम रमेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 13 समेत कई राज्यों के शहरों में पीएम2.5 का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश 

कांग्रेस ने राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (एनएएक्यूएस) को अद्यतन करने की जरूरत पर जोर देते हुए शुक्रवार को कहा कि पीएम2.5 के सुरक्षित स्तरों में बदलाव किया जाना चाहिए और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में भी तत्काल सुधार होना चाहिए।

दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में भी प्रदूषण गंभीर

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की चर्चा के बीच देश के कुछ अन्य शहरों में सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट इससे भी गंभीर है।

उन्होंने 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (सीआरईए) की हाल में प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अक्टूबर 2026 के दौरान मासिक औसत पीएम2.5 सांद्रता के आधार पर देश के तीन सबसे प्रदूषित शहर उत्तर प्रदेश में रहे। इनमें बागपत जिले का बड़ौत, गाजियाबाद जिले का खोड़ा और अमरोहा जिले का गजरौला शामिल हैं।

यूपी के 13 शहरों में मानक से अधिक प्रदूषण

रमेश ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश के 13, हरियाणा के 11, गुजरात के तीन तथा मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के दो-दो शहरों में पीएम2.5 का 24 घंटे का औसत स्तर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक से अधिक रहा।’’

उनका कहना है कि राष्ट्रीय मानक भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से तय सुरक्षित स्तर से चार गुना अधिक है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में सुधार की मांग

उन्होंने कहा, ‘‘करीब आठ साल पहले शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में तत्काल सुधार की जरूरत है और इसे केवल सड़कों की धूल कम करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।’’

कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि कार्यक्रम के तहत उद्योगों, बिजली उत्पादन और आवासीय क्षेत्रों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, सीधे उत्सर्जित होने वाले कणों को कम करने तथा द्वितीयक पीएम2.5 के निर्माण के लिए जिम्मेदार गैसीय प्रदूषकों पर अंकुश लगाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके साथ ही वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ‘एयरशेड’ आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

क्या है एयरशेड आधारित दृष्टिकोण?

वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ‘एयरशेड’ आधारित दृष्टिकोण एक वैज्ञानिक और क्षेत्रीय रणनीति है, जो साझा भौगोलिक और वायुमंडलीय क्षेत्र को एक इकाई मानकर प्रदूषण नियंत्रण का काम करती है।

2009 के बाद से नहीं बदले वायु गुणवत्ता मानक

रमेश ने कहा कि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक आखिरी बार नवंबर 2009 में अधिसूचित किए गए थे। उस समय इन्हें काफी प्रगतिशील माना गया था, लेकिन अब विशेष रूप से पीएम2.5 की सांद्रता के सुरक्षित स्तरों के संदर्भ में इन्हें अद्यतन करने की आवश्यकता है।

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