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बीजेपी शासित राज्यों में खनन जारी है, सारी रेत सरकारी है : खुलेआम हो रही है नदियों-पहाड़ों की हत्या

बीजेपी शासित राज्यों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन सारे नियम-कायदों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। नदियों और पहाड़ों की हत्या हो रही है। हम आपके सामने रख रहे हैं राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा की स्थिति।

फोटो : सोशल मीडिया
फोटो : सोशल मीडिया 

मध्य प्रदेश: बीजेपी सरकार पस्त, रेत माफिया मस्त

अवैध रेत खनन कितनी सीनाजोरी के साथ हो सकता है, यह जानना है तो कुछ दिन तो गुजारिए मध्य प्रदेश में। यहां सबकुछ बड़े संस्थागत तरीके से होता है। एनजीटी हजार नियम-कायदे बनाता रहे, अपनी बला से। होगा वही जो माफिया चाहे। अगर कोई रास्ते में आएगा तो ‘टपका’ दिया जाएगा। जी हां, यही हाल है बीजेपी की ‘जनसरोकारी’ और ‘पाक-साफ’ सरकार का। अब चूंकि वक्त चुनाव का है और शिवराज फिर आशीर्वाद पाने जनता-जनार्दन की दर पर हैं, तो लोग तो सवाल पूछेंगे ही। भोपाल से रुक्मणि सिंह की रिपोर्ट:

मध्यप्रदेश में बीजेपी के लंबे शासनकाल में अवैध रेत खनन का धंधा बेखौफ फलता-फूलता रहा। इन माफिया के हौसले किस कदर बुलंद हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छह साल में रोड़ा बनने वाले कितने ही सरकारी नुमाइंदों को मौत के घाट उतार दिया गया। इनमें एक आईपीएस अधिकारी भी थे। इसके अलावा रेत माफिया के हमले में सरकारी अधिकारियों पर जानलेवा हमले की घटनाएं तो आए दिन होती ही रहती हैं।

अवैध खनन में शामिल लोगों को राजनीतिक सरपरस्ती की बात भी अकसर उठती रही है। हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज को पत्र भी लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा, “राज्य के कई जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है और इसमें बीजेपी के नेता शामिल हैं।” कमलनाथ ने चेतावनी भी दी कि अगर कार्रवाई नहीं की गई तो इसपर आंदोलन चलाया जाएगा।

लेकिन, खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ला का कहना है कि, “नर्मदा में पिछले साल से रेत खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। यदि कोई रेत खनन करता पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।” लेकिन, मंत्री जी का दावा कितना खोखला है, यह तो भारतीय खान ब्यूरो की रिपोर्ट से ही साफ हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2013 से 2017 के बीच अवैध खनन के 516 मामले दर्ज हुए हैं।

आंकड़े देखें तो सरकार को पोल-पट्टी खुलकर सामने आ जाती है:

  • 7 सितंबर, 2018 को मुरैना में वन विभाग के चेक पोस्ट पर तैनात डिप्टी रेंजर सूबेदार सिंह कुशवाह की रेत भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर हत्या
  • 26 मार्च, 2018 को पुलिस और रेत माफिया के गठजोड़ का स्टिंग करने वाले पत्रकार संदीप शर्मा को ट्रक ने कुचला
  • 7 मई, 2016 को मुरैना की सीमा पर रेत भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने फॉरेस्ट गार्ड नरेंद्र शर्मा को कुचल दिया गया
  • 26 नवंबर, 2015 को सिविल लाइंस थाने के सिपाही अतिबल सिंह चौहान को रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बैरियर पर कुचलकर मौत के घाट उतार दिया
  • 8 मार्च, 2012 को आईपीएस नरेंद्र कुमार सिंह की बानमोर में पत्थर से भरे ट्रैक्टर ने कुचलकर हत्या कर दी थी

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छत्तीसगढ़: बिना नीलामी ही सरकार करा रही खनन

मध्य प्रदेश का पड़ोसी छत्तीसगढ़ भी अवैध खनन से अछूता नहीं है। यहां तो नियम कानून भी ताक पर रख दिए गए हैं। मसलन, नियम है कि बिना नीलामी खनन नहीं कराया जाएगा, लेकिन हो रहा है। नियम है कि उत्पादन लागत से कम पर रेट तय नहीं किया जाएगा, हो रहा है। रायपुर से प्रमोद अग्रवाल की रिपोर्ट:

छत्तीसगढ़ सरकार अस्थायी परमिट के चोर दरवाजे से बिना नीलाम किए खनिज खदानें आवंटित कर रही है। उन्हें बिना पिटपास परिवहन की छूट दी जा रही है। उनकी रॉयल्टी की गणना किए बिना क्लीयरेंस दिए जा रहे हैं। नतीजतन राज्य का वैधानिक पट्टेदार मरणासन्न स्थिति में है।

राज्य के 28 जिलों में लगभग दो हजार गिट्टी खदानें आवंटित हैं। लेकिन हालात यह हैं कि किसी का भी उत्पादन निर्धारित सीमा तक नहीं पहुंच रहा। खनिज राजस्व लगातार कम हो रहा है। 2015-16 का खनिज राजस्व 24307.47 लाख रुपये था जो 2016-17 में 18507.23 और 2017-18 में 21388.69 लाख रुपये हो गया। शासन ने खनिज की आपूर्ति न होने के बहाने शासकीय निर्माण कार्यों के लिए अस्थायी परमिट के आधार पर 2014 से बिना नीलामी खदानों का आवंटन शुरु कर दिया। स्थिति यह हो गई है कि पट्टेदार अपने उत्पादन का आधा भी नहीं खपा पा रहे हैं, जबकि निर्माण कार्यों के 80 प्रतिशत खनिज की आपूर्ति अस्थायी परमिट वाली खदानों से हो रही है।

प्रदेश खनिज महासंघ के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी ने बताया कि जांजगीर जिले में रायल्टी की दरें देश में सबसे कम हैं। यह 80 रुपये प्रतिटन है। इस दर के अलावा इसमें प्रतिटन 24 रुपये डीएमएफ, अधोसंरचना विकास उप कर 7.5 रुपये, पर्यावरण उपकर 7.5 रुपये, उत्पादन लागत दो सौ रुपये, जीएसटी 16 रुपये है।

राजस्थान : वैध-अवैध सब बराबर

देश में खनिज संपदा के लिहाज से सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल राजस्थान भी अवैध खनन की समस्या से अछूता नहीं है। अब तो यहां बजरी का अवैध खनन बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद यहां बजरी का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। जयपुर से अंकित छाबड़ा की रिपोर्ट:

राजस्थान में 81 तरह के खनिज पाए जाते हैं और इनमें से 57 का व्यावसायिक खनन होता है। डोलामाइट से लेकर लिग्नाइट और ग्रेनाइट से लेकर मैंग्नीज, मार्बल तक की बड़ी खानें हैं। पूरब में अरावली से लेकर पश्चिम में बाड़मेर और उत्तर में हनुमानगढ़ से लेकर दक्षिण में डूंगरपुर-बांसवाड़ा तक राजस्थान के लगभग हर जिले में खनन होता है।

खनन राज्य की आय का तीसरा बड़ा स्रोत है और इससे सालाना छह से आठ हजार करोड़ की कमाई होती है। लेकिन, यहां अवैध खनन भी उतने ही धड़ल्ले से होता है। राजस्थान सरकार ने खुद विधानसभा में जो आंकड़ा पेश किया है उसके मुताबिक जनवरी 2014 से दिसंबर 2017 तक राज्य में अवैध खनन के करीब 16 हजार मामले दर्ज किए गए। इनमें से 2514 मामले खान विभाग ने, 5432 मामले वन विभाग ने और 7906 मामले पुलिस ने दर्ज किए थे। ये तो सिर्फ वे मामले हैं जिनकी रिपोर्ट हुई या विभागों द्वारा आकस्मिक चेकिंग की ‘खानापूर्ति’ के दौरान सामने आ गए।

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हरियाणा: न अदालत का डर, न एनजीटी का खौफ

न सुप्रीम कोर्ट की रोक का असर है और न पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की सख्ती का। नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल का आदेश भी बेमानी है। हरियाणा में अवैध खनन बदस्तूर जारी है। उत्तर से लेकर दक्षिण और प्रदेश के मध्य क्षेत्र तक में दिन-रात अवैध खनन हो रहा है। सरकारी मशीनरी मानो ध्वस्त है। आलम यह है कि यमुना नदी का प्राकृतिक बहाव भी प्रभावित हो गया है। पंचकुला से धीरेंद्र अवस्थी की रिपोर्ट:

खनन विभाग के निदेशक संजय जून यह तो नहीं मानते हैं कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, लेकिन इतना जरूर स्वीकार करते हैं कि संभव है कहीं-कहीं छिटपुट यह हो रहा हो। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।

उत्‍तर हरियाणा में यमुनानगर से सोनीपत तक आलम यह है कि यमुना नदी के एक तरफ उत्‍तर प्रदेश के खनन माफिया हैं तो दूसरी तरफ हरियाणा के। कई जगह तो नदी को 20 फुट तक खोद डाला गया है। यहां तक कि यमुना नदी की धारा तक बदल गई है। सोनीपत में यमुना में अवैध खनन के हालात को देख एनजीटी भी हैरान रह गया। खनन में बड़ी मशीनों के इस्‍तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध के बावजूद इनके धड़ल्ले से इस्तेमाल की रिपोर्ट मिलने पर अचंभित एनजीटी को आदेश देना पड़ा कि खनन में भारी मशीनों का इस्‍तेमाल होता मिला तो डीएम और एसएसपी जिम्‍मेदार होंगे।

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