
नई दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित ‘हरा-भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्वराज, आजादी और लोकतंत्र को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत में आज की वैचारिक लड़ाई इस बात को लेकर है कि क्या कुछ लोग पूरे देश के लिए सच तय करेंगे या हर व्यक्ति को अपनी बात और अपने अनुभव को समझने का अधिकार मिलेगा।
राहुल गांधी ने कहा कि कुछ लोगों ने यह मान लिया है कि उन्हें देश के हर व्यक्ति के लिए सच पता है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के कारण छात्रों पर लगातार सवाल उठाए जाते हैं और उनकी आवाज को नजरअंदाज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई छात्र उनके पास आता है, तो उनका मानना है कि वह छात्र अपने बारे में उनसे बेहतर जानता है। राहुल गांधी के मुताबिक, उनकी भूमिका उस छात्र की बात सुनने, उसका सम्मान करने और उसे समझने की है। उन्होंने इसे देश में चल रही मौजूदा राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई का हिस्सा बताया।
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के स्वराज के विचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गांधी चाहते थे कि देश का हर व्यक्ति स्वराज के रास्ते पर आगे बढ़े। उनके मुताबिक, स्वराज का मूल विचार व्यक्ति को अपने फैसलों, सोच और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाना है। यही विचार लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका को मजबूत करता है।
राहुल गांधी के संबोधन में राजीव गांधी के विजन के साथ-साथ व्यक्ति की स्वतंत्र सोच, छात्रों की आवाज और लोकतांत्रिक मूल्यों को केंद्र में रखा गया।
राहुल गांधी ने कहा कि अक्सर ‘स्वराज’ को अंग्रेजी के शब्द Freedom के समान समझ लिया जाता है, जबकि दोनों के अर्थ में अंतर है। उनके मुताबिक, स्वराज का अर्थ है ‘स्व’ पर ‘राज’, यानी खुद पर शासन करना। उन्होंने कहा कि स्वराज केवल अधिकार या स्वतंत्रता का नाम नहीं है, बल्कि यह एक जिम्मेदारी और सोचने का तरीका भी है। किसी व्यक्ति को कोई दूसरा व्यक्ति Freedom दे सकता है, लेकिन दूसरे व्यक्ति को स्वराज नहीं दिया जा सकता।
राहुल गांधी ने स्वराज की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि अपने आप को गहराई से समझना स्वराज है। इसी तरह दुनिया और समाज के साथ किसी इंसान का व्यक्तिगत रिश्ता भी स्वराज की भावना का हिस्सा है।
राहुल गांधी ने युवाओं की पसंद और उनके सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई इंजीनियर, रसोइया या मोची बनना चाहता है तो उसे अपनी पसंद का काम करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इसी तरह अगर कोई अंतरिक्ष यात्री बनना चाहता है, तो देश और सरकार की जिम्मेदारी है कि उसे उस दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता मिले।
उन्होंने कहा कि सरकार और देश का काम लोगों की कल्पना के दरवाजे खोलना और उन्हें अपने सपनों पर भरोसा करने का अवसर देना है। देश को लोगों को उनके चुने हुए रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। राहुल गांधी ने इसे महात्मा गांधी के भारत के विजन और ‘स्वराज’ की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि यही स्वराज का रास्ता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महात्मा गांधी के ‘स्वराज’ के विचार को मौजूदा शिक्षा, परीक्षा, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि गांधीजी का विजन तभी साकार हो सकता है, जब देश की व्यवस्थाएं हर व्यक्ति को अपनी क्षमता और सच्चाई के मुताबिक आगे बढ़ने का अवसर दें।
राहुल गांधी ने कहा कि गांधीजी के विचार ऐसे शिक्षा तंत्र के साथ नहीं चल सकते, जो बहुत महंगा हो। इसी तरह ऐसी परीक्षा व्यवस्था भी उनके विजन के अनुरूप नहीं हो सकती, जिसमें निष्पक्षता का अभाव हो। उन्होंने आर्थिक व्यवस्था में कुछ चुनिंदा लोगों के वर्चस्व और ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की जरूरत पर भी सवाल उठाया, जिसकी पहुंच देश के हर हिस्से और हर नागरिक तक हो।
राहुल गांधी ने कहा कि एक खराब माहौल व्यक्ति को स्वराज से दूर कर देता है और उसकी स्वाभाविक स्थिति को बदल देता है। इसका असर उसकी जिंदगी जीने की क्षमता पर पड़ता है।उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि हर जीव एक अलग और विशिष्ट इकाई है और हर व्यक्ति का सत्य तक पहुंचने का अपना रास्ता है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी दूसरे व्यक्ति के अनुभवों को पूरी तरह जाने बिना उसके सच को समझने का दावा करना सही नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिन परिस्थितियों का सामना नहीं किया और जो चीजें खुद नहीं देखीं, उनके आधार पर किसी दूसरे व्यक्ति की सच्चाई तय नहीं की जा सकती।
राहुल गांधी ने RSS पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस को लेकर मेरी यही समस्या है कि आरएसएस ने यह तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों की सच्चाई जानता है और मैं कहता हूं-नहीं। केवल वे 1.5 अरब लोग ही अपनी-अपनी सच्चाई जानते हैं। अगर मैं यह मानने लगूं कि मैं आपकी सच्चाई जानता हूं, तो मैं पागल हूं। क्योंकि मैं आप नहीं हूं। मैंने वह सब नहीं झेला है, जो आपने झेला है। मैंने वह सब नहीं देखा है, जो आपने देखा है। मैंने उन परिस्थितियों का सामना नहीं किया है, जिनका आपने किया है। मेरे पिता वही नहीं हैं जो आपके हैं, मेरी मां वही नहीं हैं, मेरे दोस्त, मेरा भाई-कुछ भी वही नहीं है। तो मैं कैसे कह सकता हूं कि मैं आपकी सच्चाई जानता हूं?
राहुल गांधी ने BJP पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों, ईसाइयों और सिखों से कहा जाता है कि उनका अस्तित्व ही मायने नहीं रखता। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनकी जमीन छिनने का डर है और विरोध करने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। वहीं, दलितों के साथ होने वाले भेदभाव और उत्पीड़न को भी गंभीरता से नहीं लिया जाता।
राहुल ने कहा, 'कृपया ध्यान दीजिए, गांधीजी की किताब का नाम माई एक्सपेरिमेंट्स नहीं था। किसके सत्य के साथ प्रयोग? माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ, सत्य के साथ मेरे प्रयोग। अचानक लोगों के एक समूह ने यह तय कर लिया है कि क्योंकि उनके पास व्यवस्था पर नियंत्रण है, इसलिए वे इस देश में हर व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं। जब नरेंद्र मोदी कहते हैं, 'मैं छात्रों को माफ करता हूं।' इसका मतलब क्या है? कि आप लोगों का एक समूह जोकरों का है। मैं बहुत समझदार हूं, मैं सब कुछ जानता हूं, आप कुछ नहीं समझते और मैं आपको माफ करता हूं।'
राहुल गांधी ने कहा कि देश में इस स्थिति को बदलने की जरूरत है। उनके मुताबिक, धर्म, जाति, उम्र या लिंग चाहे कुछ भी हो, हर व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि ‘मैं यहां का हिस्सा हूं, मुझे यहां प्यार और सम्मान मिलता है और सत्य की मेरी तलाश भी महत्वपूर्ण है।’
उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब प्रत्येक नागरिक को अपनी पहचान, विचार और जीवन के रास्ते के साथ आगे बढ़ने की स्वतंत्रता मिले। राहुल गांधी ने इसे महात्मा गांधी के स्वराज के विचार से जोड़ते हुए कहा कि देश की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर व्यक्ति को अपनी सच्चाई तलाशने और अपने जीवन का रास्ता चुनने का अवसर मिले।
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